महाशिवरात्रि विशेष : छतीसगढ़ के गरियाबंद जिले मे स्थित है दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग , हर साल बढ़ती है लंबाई

छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में महाशिवरात्रि पर्व (Mahashivratri) को धूमधाम से मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिवालयों में भक्त भोलेनाथ के जयकारे लगा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद (Gariaband) जिले में विशालतम शिवलिंग (World Largest Shivling) में शामिल भूतेश्वर महादेव मंदिर (Bhuteshwar Mahadev Tample) में भी महाशिवरात्रि के मौके पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। दोपहर तक हजारों श्रद्धालु मंदिर में भगवान शिव के दर्शन किए। गरियाबंद के नजदीक घने वनों के बीच बसे ग्राम मरोदा में स्थित इस मंदिर में भव्य मेले का आयोजन किया गया।छत्तीसगढ़ का यह प्रसिद्ध मंदिर है, जहां महाशिवरात्रि के मौके पर दूर-दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। पिछले 60 वर्षों से यहां भव्य मेले का आयोजन होता आ रहा है। भूतेश्वर महादेव मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है, जानकारों के मुताबिक इस शिवलिंग की ऊंचाई वर्तमान में 65 फीट है। यहां देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी।12 ज्योतिर्लिंगों की तरह छत्तीसगढ़ में एक अर्धनारीश्वर प्राकृतिक शिवलिंग भूतेश्वर महादेव के नाम से विख्यात है। यह शिवलिंग हर साल बढ़ता जा रहा है। यहां हर वर्ष दूर-दराज से भक्त आकर महादेव की आराधना करते हैं। बताया जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व जमींदारी प्रथा के समय पारागांव निवासी शोभासिंह जमींदार की यहां पर खेती-बाड़ी थी। शोभा सिंह शाम को जब अपने खेत में घूमने जाता था तो उसे खेत के पास एक विशेष आकृति नुमा टीले से सांड के हुंकारने (चिल्लाने) व शेर के दहाड़ने की आवाज आती थी। उसने यह बात ग्रामीणों को बताई। ग्रामवासियों ने भी शाम को वहीं आवाजें सुनी। सांड और शेर की तलाश की गई लेकिन दूर-दूर तक कोई जानवर के नहीं मिलने पर इस टीले के प्रति लोगों की श्रद्धा बढ़ने लगी। लोग इस टीले को शिवलिंग के रूप में मानने लगे। पारागांव के लोग बताते हैं कि पहले यह टीला छोटे रूप में था। धीरे-धीरे इसकी ऊंचाई व गोलाई बढ़ती गई। जो आज भी जारी है। शिवलिंग में प्रकृति प्रदत जललहरी भी दिखाई देती है। जो धीरे-धीरे जमीन के ऊपर आती जा रही है। यही स्थान आज भूतेश्वरनाथ, भकुर्रा महादेव के नाम से जाना जाता है। छत्तीसगढ़ी में हुकारने को भकुर्रा कहते हैं।

























