क्षेत्र में सुखा से परेशान किसान,अब भी बारिश की दरकार

संतोष पटेल,भंवरपुर।अल्प एवं खंड वर्षा की वजह से एक बार फिर से भंवरपुर राजस्व निरीक्षक मंडल के गांव में सूखे की आहट सुनाई देने लगी है। बसना तहसील को पिछले वर्ष सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। इस बार भी बसना तहसील में कम बारिश की वजह से खेती किसानी का काम नहीं हो पाया। खेतों में जितनी पानी की आवश्यकता है उस मात्रा में बारिश नहीं होने से रोपा बियासी का काम ही नहीं हो पाया। जैसे जैसे दिन बितता जा रहा है वैसे-वैसे खेतों की हालत बिगड़ती जा रही है। सूखे पड़े खेतों को देखकर किसानों के चेहरे पर उदासी छाई हुई है। जिनके पास सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं उनके खेतों में थोड़ी बहुत हरियाली दिख रही है। बाकी खेतों में धान की पौधे पीले होकर मुरझाने लगे हैं। किसानों का कहना है कि पिछले दिनों बारिश तो हुई मगर खेतों की प्यास नहीं बुझ पाई। सूखे खेतों में यूरिया सुपर खाद डालने से फिलहाल धान का पौधा हरा भरा तो दिख रहा है मगर खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं। छोटे क़िस्म के धान के पौधों में अब बाली आने का समय आ चुका है ।पानी के अभाव में पौधों में वृद्धि हो पाई है न ही कंसा नहीं निकल पाया है। हफ्ते भर से पानी नहीं गिरा है। लगातार तीन वर्षों से क्षेत्र सूखे की चपेट में है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बसना तहसील क्षेत्र के भंवरपुर आरआई क्षेत्र में धान की फसल ज्यादा खराब हुई है ।खासकर भंवरपुर, बड़े साजापाली, लंबर, रोहिना, बिछिया, जमदरहा आदि क्षेत्रों में इस साल बहुत ही कम बारिश हुई है। यहां तक गांव के तालाब पोखरों में पानी नहीं भर पाया है जिससे सिंचाई कर फसल बचा सकें। नदी नालों में भी पानी का बहाव कम होने से सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पा रही है। कुल मिलाकर किसानों के सामने फसल बचा पाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है ।कई गांव में भाटा खार में लगी धान की फसल को मवेशियों के हवाले कर चुके हैं ।पानी के अभाव में धान की अपेक्षा खरपतवार ज्यादा होने से फसल के उत्पादन पर प्रभाव पड़ सकता है ग्राम भंवरपुर के युवा कृषक कृष्ण कुमार पटेल ने बताया कि पानी के अभाव में किसान रोपा बियासी भी नहीं कर पाए हैं। कई खेतों में रोपाई के लिए लगाए गये नर्सरी जस के तस पड़े हैं। गांव के नीरू पटेल ने बताया कि क्या भाव में खेत सूखे पड़े हैं तथा सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं होने से भगवान भरोसे हैं पानी गिरा दो लागत वसूली हो सकती है अन्यथा लागत भी मिलना मुश्किल है ग्राम रोहिना के रूप आनंद पटेल ने बताया कि बाहरा नार में तो फसल ठीक-ठाक है मगर भाठा खार में एक बूंद पानी नहीं है आधी फसल भी मिल गया तो बहुत है।बड़ेसाजापाली के धर्मेंद्र सिदार ने बताया कि इस साल पिछले वर्ष से भी कम पानी गिरने से पिछले साल से भी ज्यादा भयावह स्थिति बनती जा रही है। खेत तो दूर नदी नालों और तालाबों में भी पानी नहीं भर पाया है।सागरपाली के कृषक कन्हैया पटेल ने बताया कि बारिश नहीं होने से फसल की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है हफ्ते भर भीतर पानी नहीं गिरा तो कई खेतों को मवेशियों के हवाले छोड़ना पड़ सकता है।

























