छत्तीसगढ़

क्राईम ब्रांच के सशक्तिकरण के लिए आईजी दुर्ग ने जारी किया दिशा-निर्देश

श्री जीपी सिंह, रेंज पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग द्वारा जिलों में गठित क्राईम ब्रांच के दायित्वों एवं क्रियाकलापों के पर्यवेक्षण/नियंत्रण के नियमन के लिए रेंज के पुलिस अधीक्षकों को परिपत्र (विस्तृत दिशा-निर्देश) जारी किया गया है।

जिसके अंतर्गत:-

 क्षेत्र को बीटों में विभाजित कर क्राईम ब्रांच के स्टाॅफ को, जिम्मेदारी देने की कार्यप्रणाली को समाप्त कर अपराधों की प्रकृति के अनुसार डेस्क निर्मित करने का निर्देश दिया है। जिसके तहत् मुख्य रूप से शरीर संबंधी, सम्पत्ति संबंधी, सायबर अपराध, संगठित तरीके से होने वाले अपराध एवं दीगर प्रकृति के अपराधों के लिए पृथक-पृथक डेस्क बनाने का निर्देश दिया गया है।

 जारी परिपत्र में क्राईम ब्रांच में सेवा रिकार्ड की छानबीन कर योग्य, मेहनती एवं कार्य के प्रति समर्पित ऐसे स्टाॅफ को ही रेंज पुलिस महानिरीक्षक के परामर्श पर रखने का निर्देश दिया गया है, जिसे विवेचना कार्य का गहन अनुभव हो तथा जिसे क्षेत्र के अपराधियों एवं उनकी कार्यप्रणालियों का ज्ञान हो।

 क्राईम ब्रांच में स्टाॅफ की तैनाती अधिकतम 3 वर्ष के लिए होगी, असंतोषजनक सेवा की स्थिति में 3 वर्ष के पूर्व भी तब्दील किया जा सकेगा।

 अपराधों के घटित होने पर संबंधित डेस्क के प्रत्येक स्टाॅफ शीघ्रतापूर्वक घटना स्थल का अनिवार्यरूप से निरीक्षण करेंगे एवं प्रकरण को सुलझाने में योगदान देंगे। अंधे कत्ल, डकैती, लूट, सम्पत्ति संबंधी गंभीर अपराधों एवं सफेदपोश आरोपियों द्वारा किए गए अपराधों की विवेचना की जाकर पतारसी/बरामदगी की कार्यवाही की जाएगी। अपराधियों के गतिविधियों एवं उनके कार्यप्रणाली का वैज्ञानिक अध्ययन कर उस पर त्वरित एवं प्रभावी अंकुश लगाने हेतु थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेंगे।

 क्राईम ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक/उप पुलिस अधीक्षक, थानों का औचक निरीक्षण कर सकेंगे, अपराधों के निकाल के लिए समुचित निर्देश दे सकेंगे तथा औचक भ्रमण के संबंध में पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट करेंगे।

 परिपत्र में स्टाॅफ को न्यायालय व जेल परिसर में जाकर पेशी में आने वाले व जेल से छूटने वाले बंदियों तथा उनके मुलाकातियों पर नजर रखने की हिदायत दी गई है तथा किसी भी तरह की संदिग्ध स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियो को सूचित करने के लिए कहा गया है।

 दीगर प्रांत के अपराधी स्थानीय मिलीभगत से जमानत पर छूटने के उपरांत, जमानतदार सहित अदम पता हो जाते हैं, ऐसे जमानत आवेदनों पर भी समुचित निगाह रखी जाएगी। इसी तरह जेल से पेरोल पर अथवा रिहा होकर आए बंदियों की जानकारी रखने एवं उन पर निगाह रखने की भी जिम्मेदारी क्राईम ब्रांच को दी गई है।

 इस शाखा में अपराधों एवं अपराधियों का केन्द्रीयकृत डेटा बेस संकलित किया जाएगा तथा उसका एलबम/डोजियर बनाकर रखेंगे। गैंग हिस्ट्रीशीट/ जिला बदर/ रासुका की कार्यवाही, वारंटों की तामिली, फरार बदमाशों की पतारसी में थानों को सहयोग करेंगे, नये/पुराने सभी बदमाशों का रिकार्ड मेंटेन करेंगे। पडोसी जिलों एवं दीगर राज्य के संबंधित अधिकारियों से सम्पर्क/समन्वय स्थापित कर समय-समय पर अपराधियों की जानकारी साझा करेंगे एवं प्राप्त जानकारी के अनुसार यथोचित कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे।

 पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रति माह शाखा के कार्यों की समीक्षा कर टास्क दिया जाएगा एवं शाखा की गतिविधियों पर निगाह रखी जाएगी।

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काका खबरीलाल

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