क्या स्मार्टफोन के उपयोग से कोरोना को हराना संभव?- डॉ. एन. कुमार स्वामी

महासमुन्द (काकाखबरीलाल). आज समस्त विश्व कोरोना महामारी के संकट से गुजर रहा है सभी सम्भव टेक्नोलोजी का उपयोग इस संकट से उबारने के लिए उपयोग में लाये जा रहे है .भारत भी पूरे विश्व की तरह इस महामारी से बचने के सभी सम्भव उपायों में प्रयासरत हुआ है. यद्यपि विकासशील देशो के किये यह एक अत्यंत विशाल चुनौती है फिर भी प्रशासन लोकडाउन के माध्यम से और सभी सम्भव सुरक्षा उपायों को डॉक्टर, स्वास्थ्य, पुलिस, सफाई कर्मचारियो जैसे कोरोना वारियर्स के सशक्त माध्यम से जनता को इस महामारी के लिए सजग करने के प्रयास में सक्रिय है. अभी हाल ही में भारत सरकार ने आरोग्य सेतु एप के माध्यम से कोविड १९ की सही-सही जानकारी, कोरोना के लिए जागरूकता, रोकथाम तथा आसपास कोरोना के मरीजो के होने का अलर्ट उपलब्ध कराने के लिए कारगर साधन के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है. प्रशासन ने प्रत्येक माध्यम से इस एप को स्मार्टफोन में प्ले स्टोर से डाउनलोड करने की अपील की है आज करीब सात करोड़ स्मार्टफोन तक यह एप पहुच चुका है और जागरूकता के साथ साथ ये एप बहुत जल्द समस्त भारतवर्ष के स्मार्टफोनो तक भी पहुच जायेगा. इसमें कोई संदेह नहीं है कि मोबाइल फोन आधुनिक विश्व में एक सशक्त सम्प्रेषण के माध्यम के साथ डिजिटल क्रांति के साथ हर क्षेत्र में अपनी भूमिका अदा करना हो, चाहे वह सुरक्षा हो या स्वास्थ्य के क्षेत्र में. अब प्रश्न उठता है कि क्या हमारे स्मार्ट फोन इतने स्मार्ट है कि हमे कोरोना या अन्य बीमारियों से भी बचा और उस से लड़ने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है?
स्मार्टफोन तेजी से अपने तकनीक को विकसित कर स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति के लिए एक धुरी की तरह कार्य कर रहा है. स्मार्टफोन का शक्तिशाली प्रोसेसर जो कि कई जटिल डाटा को प्रभावशाली ढंग से विश्लेषण कर सकता है. इसके अलावा सेंसर्स, फ्लेश, कैमरा, माइक्रोफोन और एक्सेलेरोमीटर इसे अधिक डेटा अधिग्रहण के लिए अनुमति प्रदान करता है कि तथा अधिक मजबूत सूचना के विश्लेषण में योगदान देता है. कुछ बाहरी हार्डवेयर अटैचमेंट विकसित करने के साथ फोन की केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई द्वारा क्षमताओं को किसी भी क्षेत्र में उपयोग करने के लिए सक्षम बनाती है.
उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्टेथोस्कोप जो कि श्वास और ह्रदय गति ध्वनि और कंपन को प्रवर्धित कर फेफड़ों और ह्रदय की जाँच करता है वही कार्य आज कई डॉक्टर एक स्मार्टफोन से ले रहे है जिसमे एक बाहरी प्रवर्धक युक्ति के उपयोग द्वारा स्मार्टफोन और भी प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है. स्मार्टफोन कफ, अस्थेमा, निमोनिया जैसी श्वास से जुडी समस्याओ के लिए सामान्य स्टेथोस्कोप से भी ज्यादा प्रभावी ढंग से विश्लेषण और निदान के लिए अग्रसर है.
एक सामान्य एलेक्ट्रोकोर्डियोग्राम एक वजनी कंप्यूटर युक्त मशीन हुआ करता था पर स्मार्ट फोन से जुड़े स्मार्ट घड़ी के साथ और ज्यादा वास्तविक मोनिटरिंग के लिए उपयोग में लाई जा रही है. एक साधारण विसिटिंग कार्ड के आकार के इ सी जी जो कि स्मार्टफोन के वायरलेस या वाई फाई द्वारा जुड़ा होता है जिसकी सहायता से मिनटों में हृदय संबधी किसी भी व्याधि का अनुमान लगाया जा सकता है.
अलगोरिथमस के साथ कृत्रिम तंत्रिका तंत्र (ए एन एन) के उपयोग से मस्तिष्क संबंधित अनेक प्रकार के विद्युत तरंगों का अध्ययन कर घर पर ही मष्तिष्क रोगियों और ऐसे मरीज जोकि चलने फिरने में असमर्थ है उनके लिए उपयोग में लाई जा रही है. नेचर पत्रिका में ऐसे कई सम्भावित उपायों के बारे में वैज्ञानिको द्वारा लेख द्वारा बताया जा रहा है.
श्रवण और नेत्र से संबन्धित चिकित्सा युक्तियों में भी स्मार्टफोन का उपयोग कुछ वर्षों में बढ़ा है. विशेष रूप से छोटे बच्चो के कान और आँख के अंदर चित्र लेने की क्षमता अधिक रेसोल्यूशन वाले कैमरों की सहायता से बढ़ी है और साथ ही साथ काफी अच्छे परिणाम भी प्राप्त हो रहे है. इस प्रकार से हम देख सकते है की एक स्मार्टफोन एक हायब्रीड डॉक्टर के क्लिनिक की तरह भविष्य में उपयोग में लाया जा सकता है.
हाल में पैदा हुए कोरोना संकट में चाइना ने स्मार्टफोन की विशेषताओ जैसे फेस डिटेक्शन, कैमेरा के साथ सेन्सर्स जैसे थर्मल कैमेरा उपयोग कर के उपयोग से शरीर के तापमान को मापकर करोडो स्मार्टफोन के डाटा उपयोग में लाकर कई हजार कोरोना संक्रमित लोगो की पहचान की.
वैज्ञानिको ने यह भी दावा किया है कि स्मार्टफोन के प्रयोग से हृदय गति और चेहरे की बनावट में बदलाव का अध्ययन कर व्यक्ति के व्यवहारिक बदलाव और किसी भी स्वास्थ्य से सम्बन्धी आशंका को जाना जा सकता है. हमारा स्मार्टफोन पहले ही ढेर सारे सेंसर, कृत्रिम इंटेलिजेंस और कैमरे क्वालिटी से युक्त है . इसके अलावा कई देशो में आँख के रेटिना और फिंगर प्रिंट जो हमारे स्मार्टफोन के माध्यम से जुडी होती है उसके द्वारा किसी भी व्यक्ति की पहचान सेकंडों में सम्भव है. ह्रदय गति और शरीर के ताप के माध्यम से अन्य बीमारियों की जानकारी के साथ साथ शुगर नियंत्रण और व्यावहारिक बदलाव (गुस्सा, प्रेम, हंसी) को समझने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है. अब अगर कल्पना करे कि किसी प्रतिनिधि का भाषण सुनते वक्त शरीर के ताप और हृदय गति को समझकर किसी व्यक्ति का भाव उसके भाषण के प्रति समझा जा सकता है. आशय यह है कि स्मार्टफोन के बढते उपयोग के साथ साथ इसके बदलते आयाम से कोई इनकार नहीं कर सकता है.
लेखक आई एस बी एम विश्वविद्यालय, कोसमी, छुरा, गरियाबंद जोकि सूदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित आदिवासी बहुल क्षेत्र है, के अकादमिक अधिष्ठाता है उन्होंने विश्वविद्यालय की भागीदारी विभिन्न संकायों में संचालित संस्थाओ जैसे कि विज्ञान क्लब जोकि विद्यार्थियों के शोध के गुण को सशक्त और अपने ध्येय वाक्य “विद्यार्थी: एक युवा वैज्ञानिक के रूप में” की भी जानकारी दी. उन्होंने आह्वान किया है कि युवा वर्ग को इन आयामों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर स्मार्टफोनो के उपयोग को और भी सशक्त बनाना होगा. सिर्फ पब जी और सोशल नेटवर्किंग तक सीमित ना करते हुए भारत सरकार द्वारा आरोग्य सेतु एप के भांति और भी नए-नए अविष्कार करने के लिए प्रतिबद्ध होना पड़ेगा. तब ही भारत पूरे विश्व के लिए एक बेहतर कल की कल्पना को साकार तथा कोरोना जैसी किसी भी महामारी के लिए तैयार हो पायेगा.



























