सरायपाली :स्कूल जर्जर एक कमरे में लग रहीं 5 कक्षाएं जानिए पुरा मामला

सरायपाली (काकाखबरीलाल). आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल खुलने, स्कूलों में शिक्षकों का प्रमोशन, स्थानांतरण की प्रक्रिया होने के बाद वनांचल ग्राम में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ब्लॉक के सहजपानी में तो शिक्षक के साथ-साथ भवन का भी अभाव है।
एक नवनिर्मित शाला भवन उपयोग के पहले अनुपयोगी हो गया। दूसरा मूल शाला भवन अति जर्जर हालत में पहुंच गया है। बच्चों को बिठाने के लिए एकमात्र प्रधान पाठक कक्ष ही है। जहां जगह का अभाव है। बावजूद 5 कक्षाएं लग रहीं हैं। जिन्हें केवल एक शिक्षक ही पढ़ा रहा है। ओडिशा सीमा से लगे वनांचल ग्राम सहजपानी में स्थित प्राथमिक शाला में पहली से पांचवी तक 47 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यहां एकमात्र शिक्षक पदस्थ है। विद्यार्थियों को पढ़ाने शाला भवन नहीं है। मूल शाला भवन जर्जर है और एक नवनिर्मित भवन उपयोग के पहले अनुपयोगी हो गया है। यह 20 वर्ष पूर्व साढ़े 3 लाख की लागत से बना था। मूल शाला भवन के अभाव में स्कूल परिसर में स्थित प्रधान पाठक कक्ष में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। बच्चों की दर्ज संख्या इतनी अधिक है कि प्रधान पाठक कक्ष में बच्चों को बैठने के लिए जगह का अभाव होने लगा है। जगह की कमी के अलावा एक कक्ष में 5 कक्षाओं के विद्यार्थी बैठकर कैसे अध्ययन कर रहे होंगे, वहां पढ़ाई का स्तर कैसा होगा समझा जा सकता है। लेकिन, इन समस्याओं को जानने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को फुर्सत नहीं है और ना तो वे भवन की समस्या को लेकर सुध ले रहे हैं और नहीं शिक्षक को लेकर। विद्यार्थी शिक्षक व भवन की कमी से जूझ रहे हैं। पालक इतने सक्षम नहीं हैं कि अपने बच्चों को अन्य स्कूल में दाखिला कराएं या प्राइवेट स्कूल भेजकर अध्ययन करवाएं। ब्लॉक में कई ऐसे स्कूल हैं, जहां बच्चों की कमी के कारण स्कूलों को मर्ज करने की स्थिति आ चुकी है। लेकिन, वनांचल ग्राम में बच्चों की दर्ज संख्या इतनी अधिक है कि दो से अधिक शिक्षक व पढ़ने के लिए पांच कक्ष की आवश्यकता है। दुर्भाग्य से विद्यार्थियों को यह दोनों नसीब नहीं हो रहा है। ग्रामीण संतोष प्रधान, नेत्रो बरिहा, संत कुमार साहू, चंद्रमणि विश्वकर्मा, शंकर राणा, प्रशांत प्रधान, श्यामलाल बरिहा, घुराऊ नायक, सुरेंद्र प्रधान, मुनीराम बंछोर आदि लोगों ने बताया कि स्कूल भवन, शिक्षकों की कमी को लेकर उनके द्वारा पूर्व में शिक्षा विभाग व जन समस्या शिविर में कलेक्टर को ध्यानाकर्षण करवाया था, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। स्कूल में भवन व शिक्षक की कमी से पढ़ाई व्यवस्था चरमरा गई है। स्कूल परिसर में बाउंड्रीवाल भी नहीं है। जिससे स्कूल परिसर के आस-पास के रहवासियों द्वारा स्कूल की जमीन का भी उपयोग किया जा रहा है। बाउंड्रीवॉल के अलावा शौचालय भी जर्जर हो चुके हैं। जिससे विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीइओ प्रकाश चंद्र मांझी ने कहा कि एक-दो दिन में वहां शिक्षक की व्यवस्था हो जाएगी। अतिरिक्त कक्ष के लिए प्रस्ताव मंगाए गए हैं। स्वीकृति मिलते ही नए भवन बनेंगे। अगले सत्र से विद्यार्थियों को भवन की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।
इस संबंध में स्कूल के प्रभारी प्रधान पाठक प्रफुल्ल बरिहा से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि शिक्षक व भवन की कमी है। बच्चों को बैठाकर अध्यापन करवाने स्कूल के समीप आस-पास में भी जगह का अभाव है। जिसके चलते स्कूल परिसर में स्थित प्रधान पाठक कक्ष में कक्षा संचालित की जा रही है। मूल शाला भवन डिस्मेंटल योग्य हो गया है। लेकिन, उसे ना तो डिस्मेंटल किया जा रहा है और नहीं नए भवन की स्वीकृति मिल रही है। शिक्षा विभाग को भवन और शिक्षक की कमी को लेकर पूर्व में कई बार शाला विकास समिति व प्रधान पाठक की ओर से अवगत कराया जा चुका है।



























