श्रद्धा एवं उल्लास से हुआ देवशिल्पी का पूजन

– डिग्रीलाल जगत
खरसिया (काकाखबरीलाल) । देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा का पूजन सभी कल कारखानों एवं प्रतिष्ठानों में श्रद्धा एवं उत्साह पूर्वक किया गया।
कारीगरों का मानना है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से साल भर मशीनें धोखा नहीं देतीं, वहीं सभी कार्य निर्बाध संपन्न होते हैं। दिन भर जगह-जगह देवशिल्पी का पूजन होता रहा। प्रसाद एवं भंडारे का आयोजन भी किया गया। वहीं शाम ढलते ढलते विसर्जन की तैयारियां होने लगीं।
ऋग्वेद में देव शिल्पी के महत्व को लेकर 11 ऋचाएं भी लिखी गई हैं। कहा जाता है कि विश्वकर्मा ने सतयुग में स्वर्ग लोक बनाया और त्रेता युग में सोने की लंका बनाई, द्वापर युग में द्वारिका और कलयुग में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा भी बनाई गई हैं। साथ ही बलभद्र एवं सुभद्रा की विशाल मूर्तियों के निर्माण के अलावा यमपुरी, पांडवपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, शिवमंडलपुरी तथा सुदामापुरी इत्यादि का भी निर्माण किया।






























