पिथौरा

आंधी-तूफान बाद गन्ना दुकान में आग, गरीब किसान की आजीविका तबाह, प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल

 

नंदकिशोर अग्रवाल,काकाखबरीलाल@ पिथौरा। स्थानीय बस स्टैंड के पास बुधवार दोपहर बाद आंधी-तूफान के दौरान अचानक ही एक अस्थाई गन्ना दुकान में आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटो से गरीब किसान की आजीविका का एकमात्र साधन जलकर नष्ट हो गया। इस हादसे ने गरीब किसान को न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाया, बल्कि न्याय की आश लेकर प्रशासन के समक्ष पहुंचे किसान, प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर किया हैं ।बता दे घटना के समय तेज आंधी-तूफान के बीच बस स्टैंड के पास स्थित गन्ना दुकान में अचानक आग लग गई। प्रशासन को अब तक यह पता नहीं चल सका कि आग लगने का सटीक कारण क्या था। अनुमान लगाया जा रहा है कि बिजली के तारों से निकली चिंगारी या तूफान के कारण कोई अन्य तकनीकी खराबी इसका कारण हो सकती है। उस समय दुकान का संचालक अग्नि साहू मौके पर मौजूद नहीं था। दोपहर बाद अचानक आग की लपटों ने देखते ही देखते दुकान को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां रखे मशीन, पाटा, मोटर सहित करीब 50,000 रुपये की संपत्ति जलकर राख हो गई।

प्रशासन की संवेदनहीनता

इस त्रासदी के बाद पीड़ित किसान ने स्थानीय प्रशासन अनुविभागीय अधिकारी (रा) एवं तहसीलदार पिथौरा नितिन ठाकुर से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी। प्रशासन ने न तो नुकसान का आकलन किया और न ही कोई तत्काल राहत प्रदान की। इसके बजाय, दुकान को “अवैध” करार देकर किसान की मदद करने से इनकार कर दिया। नम आंखों से अपनी आपबीती सुनाते हुए किसान ने बताया, “यह दुकान मेरी रोजी-रोटी का एकमात्र साधन थी। अब मेरे सामने परिवार चलाने की विकट समस्या खड़ी हो गई है।”
गन्ना दुकान चलाने वाला यह किसान अपनी मेहनत और गन्ने की बिक्री से परिवार का भरण-पोषण करता था। यह दुकान उसकी आजीविका का आधार थी, जिसके नष्ट होने से वह पूरी तरह टूट चुका है। आर्थिक तंगी और रोजगार के अभाव में अब उसके सामने भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस उदासीनता पर नाराजगी जताई और किसान के प्रति सहानुभूति व्यक्त की।

जिला कलेक्टर से उम्मीद

स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई सहायता न मिलने के बाद अब पीड़ित किसान ने जिले के कलेक्टर विनय लगेह से मदद की उम्मीद जताई है। जिला कलेक्टर विनय लंगेह जो अपनी संवेदनशीलता और जनहित के कार्यों के लिए जाने जाते हैं, उनसे किसान को आर्थिक सहायता और दुकान पुनर्स्थापन की आस है। स्थानीय लोग भी मांग कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले में त्वरित कार्रवाई करे और पीड़ित किसान को उचित मुआवजा प्रदान करे।
इस पूरे घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए है जैसे आग लगने के सही कारणों की जांच क्यों नहीं की गई क्या एक गरीब की आजीविका का साधन अस्थाई को अवैध बताकर मदद से इनकार करना कहां तक उचित है? प्राकृतिक आपदा के दौरान गरीब किसान की मदद के लिए कोई तंत्र क्यों सक्रिय नहीं हुआ इस तरह के कई सवाल स्थानीय लोगों के जेहन में उठ रहे है

मदद की मांग

किसान और स्थानीय जनसमुदाय ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल नुकसान का सर्वे करे और पीड़ित को आर्थिक मदद दे। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बिजली तारों की नियमित जांच और आपदा प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था की जरूरत है। यह घटना न केवल एक गरीब किसान की त्रासदी है, बल्कि प्रशासनिक सुस्ती और गरीबों के प्रति उदासीनता को भी उजागर करती है। यदि जिला कलेक्टर इस मामले में हस्तक्षेप करते हैं, तो न केवल पीड़ित किसान को राहत मिलेगी, बल्कि यह अन्य गरीब मेहनतकशों के लिए भी एक मिसाल बनेगा। समाज और सरकार का दायित्व है कि वे ऐसे संकटग्रस्त लोगों के साथ खड़े हों, ताकि उनकी मेहनत और उम्मीदें दोबारा जाग उठें।

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