महासुमंद

महासमुंद:बकुल को कच्चे और जर्जर मकान से मिली मुक्ति

महासमुंद विकासखण्ड के सिरपुर गांव में रहने वाली 65 वर्षीय बकुल समद्दार का जीवन कठिनाइयों से भरा रहा है। पति की मृत्यु के बाद बेहद गरीब स्थिति में थीं। वे एक कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर थीं, जहाँ रोजमर्रा की जिंदगी एक संघर्ष बन चुकी थी। उनका हमेशा से एक पक्के मकान का सपना था, परंतु उनकी आर्थिक स्थिति ने इसे साकार होने से रोका।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत, बकुल समद्दार को एक नई उम्मीद मिली। जब उन्हें इस योजना के अंतर्गत आवास निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई। यह उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। योजना के तहत उन्हें चरणबद्ध तरीके से धनराशि मिलनी शुरू हुई। प्रथम किस्त के रूप में 25,000 रुपये मिलने के बाद उन्होंने अपने मकान का निर्माण कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे अन्य किस्तों के रूप में 40,000 रुपये दूसरी और तीसरी बार दिए गए। मकान की छत का काम पूरा हुआ, और जल्द ही उन्हें अंतिम किस्त के रूप में 15,000 रुपये भी प्राप्त हुए। इस प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बकुल समद्दार को कुल 1,20,000 रुपये मिले, जिससे उनका मकान पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया।

अब बकुल समद्दार एक पक्के मकान में रह रही हैं, जो न केवल उनका सपना था बल्कि उनके जीवन की सबसे बड़ी ज़रूरत भी थी। इस मकान में वे अपने दिवंगत पति की यादों को संजोकर रखती हैं और इस योजना के लिए प्रधानमंत्री का दिल से धन्यवाद करती हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना ने न केवल उन्हें एक घर दिया है, बल्कि सम्मान और सुरक्षा की भावना भी प्रदान की है।आज बकुल समद्दार खुशी और गर्व के साथ अपने नए मकान में रह रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके जैसे हजारों गरीबों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद अपने सपनों को पूरा कर पाने में समर्थ हुए हैं। यह योजना बकुल जैसे हितग्राहियों के लिए एक वरदान साबित हुई है, जिसने उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान किया।

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काका खबरीलाल

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