दिल्ली

महिला को काटना बंदर को पड़ा भारी… मिली उम्र कैद की सजा

मिर्जापुर (काकाखबरीलाल).देश की अदालतों में अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा मिलना तो आपने सैकड़ों बार सुना होगा लेकिन किसी बंदर को आजीवन कारावास मिला हो ऐसा शायद ही आपने सुना हो. जी हां, ऐसा ही हैरान करने वाला मामला कानपुर से आया है. जहां कालिया नाम के एक बंदर को आजीवन कारावास की सजा दी गई है.बंदर ने चिड़ियाघर के वन रेंजर चौहान की बेटी का पूरा गाल ही काट लिया था. कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि तीन साल में अपने काटने के स्वभाव को न बदलने के कारण अब बंदर को जीवन भर पिंजड़े में ही रहना होगा. वहीं दूसरी ओर महिलाओं से खास दुश्मनी रखने वाले इस कालिया बंदर की उम्रकैद की सजा सुनते ही महिलाएं काफी खुश हैं.दिसंबर 2017 में बंदर ने 30 से अधिक बच्चों को काटा था। बंदर सिर्फ छोटे बच्चों को निशाना बना रहा था। वह उनके चेहरे को काटकर जख्मी कर रहा था। हालत ये हो गई थी कि लोग बच्चों को घर से बाहर निकलने नहीं दे रहे थे। वह सड़क पर भीड़ होने के बावजूद सात वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के चेहरे को जख्मी कर भाग जाता था। उसके हमले की शिकार बनीं अधिकांश बालिकाओं को प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ी। कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि तीन साल तक हमने इसके काटने वाले स्वभाव को बदलने की कोशिश की लेकिन ये नहीं बदला. कानपुर चिड़ियाघर के चिकित्सा अधिकारी मोहम्मद नासिर का कहना है कि इसका व्यवहार 3 साल में भी नहीं बदला है. अगर इस बंदर को खुला छोड़ दिया जाए तो यह जहां जाएगा वहां कम से कम पच्चीस लोगों को काटना शुरू कर देगा. ये बंदर अलग स्वभाव का है इसलिए इसको उम्रकैद की सजा दी गई है. जब तक इसकी जिदंगी है ये पिंजड़े के अंदर ही रहेगा. तीन वर्ष पूर्व मिर्जापुर जिले के शहर और कटरा कोतवाली क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में बंदर आतंक का पर्याय बन गया था। वह सैकड़ों लोगों को काट चुका था। दिसंबर में उसका आतंक चरम पर पहुंच गया था। वह महिलाओं व छोटी बच्चियों के चेहरे को काट कर भाग जाता था। कानपुर से वन विभाग की टीम ने एक जनवरी 2017 को बंदर को बंदूक से बेहोशी का इंजेक्शन लगाकर पकड़ा था।

बंदर को पकड़ कर ले गई कानपुर प्राणी उद्यान की टीम ने अस्पताल परिसर में पिंजड़े में बंद रखा। मुंह व शरीर काला होने के कारण उसका नाम कलुआ रखा गया।

प्राणी उद्यान के अस्पताल में काफी समय तक उसे आइसोलेशन में रखा गया। पिंजड़े में कैद बंदर की हर हरकत और गतिविधियों पर डॉक्टर और विशेषज्ञ नजर रखे थे। लेकिन तीन वर्ष तक उसके व्यवहार में कोई नरमी या सुधार देखने को नहीं मिला। इसके चलते प्राणी उद्यान के डाक्टर और विशेषज्ञ ने उसे ताउम्र पिंजड़े में ही कैद रखने का फैसला लिया।
प्राणी उद्यान कानपुर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ मोहम्मद नासिर ने बताया कि बंदर के पकड़े जाने पर छानबीन में पता चला कि वह मांस खाने, शराब पीने का आदी था। उसे तांत्रिक ने पाला था। तांत्रिक उसे शराब देता था। तांत्रिक की मौत के बाद बंदर आजाद हुआ तो लोगों को जख्मी करने लगा। वह ज्यादातर बच्चियों और महिलाओं को काटता था।
कानपुर चिड़ियाघर से आये विशेषज्ञों की टीम ने दो दिन की मशक्कत के बाद किसी तरह बंदर को पिंजरे में कैद करने में कामयाबी हासिल की थी। पशु चिकित्सा अधिकारी मोहम्मद नासिर ने बताया कि कलुआ बंदर ने दूसरे गैंग पर हमला कर एक बंदरिया को अपना शागिर्द बना लिया था। बंदरिया उसकी चौकीदारी करती थी। पहले दिन जब उसे पकड़ने की कोशिश की गई तो बंदरिया ने आवाज लगाकर उसे चौकन्ना कर दिया था। पहले दिन बंदर ने टीम को खूब छकाया। दूसरे दिन दो इंजेक्शन लगने के बाद वह बेहोश हुआ। इसके बाद टीम उसे पकड़कर पिंजरे में डालकर कानपुर चिड़ियाघर ले गई थी।
डॉक्टरों का कहना है कि इसके आगे के दांत इतने खतरनाक हैं कि वह पूरा मांस ही उखाड़ लेता है. ये इतना चालाक है की खाना देने वाले पुरुष व्यक्ति से तो नाराज हो जाता है लेकिन किसी महिला को देखते ही इशारे से उनको बुलाकर काटने की कोशिश करता है. तीन साल में इसने महिलाओं और बच्चियों से अपनी दुश्मनी नहीं बदली उनको आज भी अपना दुश्मन मानता है.मिर्जापुर का कलुआ बंदर प्राणी उद्यान में बंद था। लोग उसे देखने आते थे। पशु चिकित्सा अधिकारी मोहम्मद नासिर ने बताया कि पुरुष के पास आने पर वह गुस्साता था, पर महिलाओं को दूर से ही इशारे कर पास बुलाता। महिलाएं जब पिंजड़े के पास आ जाती तो उन्हें काटने के लिए दौड़ता।

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छत्तरसिंग पटेल

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