चार दिन पश्चात होलाष्टक… शुभ कार्यों पर लगेगी रोक

लग जाती है और होली पर्व समाप्त होने के बाद ही होलाष्टक समाप्त होता है। पंडितों की मानें तो गुरू अस्त होने के कारण पहले से ही मांगलिक कार्यों पर रोक लगी हुई है। होली का त्योहार 18 मार्च को मनाया जाएगा। इस पर्व को लेकर बाजार धीरे-धीरे सजने लगा है। कोविड के कारण पिछले दो सालों से इस पर्व में रौनक नहीं थी। लिहाजा इस साल उम्मीद है कि यह पर्व उत्साह से मनेगा। हालांकि इसे लेकर प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।
नगर पंडित हेमंत तिवारी ने बताया कि होलाष्टक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ होती है और फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ खत्म हो जाता है। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि को रात 2.56 बजे से होलाष्टक लग जाएगा जो 17 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगी। मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसलिए होली से 8 दिनों पहले सभी शुभ कार्य पर रोक लग जाती है। ऐसा माना जाता है कि होलाष्टक के समय यानी होली से 8 दिनों पहले तक सभी ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है। शुभ कार्यों के लिए ग्रहों की ये स्थिति अच्छी नहीं मानी जाती है।
होलाष्टक में हिंदू धर्म से जुड़े सोलह संस्कार समेत सभी शुभ कार्य नहीं किया जाता। चाहे कोई नया घर खरीदना हो या कोई नया व्यवसाय शुरू करना हो सभी शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं। यदि इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है तो उनके अंतिम संस्कार के लिए भी शांति पाठ कराई जाती है। मान्यता अनुसार किसी भी नविवाहिता को अपने ससुराल की पहली होली नहीं देखनी चाहिए। ऐसी हिंदू समाज में परंपरा भी चली आ रही है कि नव वधू पहली होली अपने मायका में मनाती है।



























