छत्तीसगढ़

शिक्षाकर्मियों को बड़ा झटका : बिना अनुमति उच्च पदों में ज्वाइन करने वालों का निचले पदों का सर्विस पीरियड काउंट होने पर सस्पेंस… “राज्य सरकार ने हाइकोर्ट के फैसले को डबल बेंच में किया चैलेंज”

ख़बरीलाल स्पेशल । रायपुर 7 अप्रैल 2018। संविलियन की बाट जोह रहे शिक्षाकर्मियों को राज्य सरकार ने एक बड़ा झटका मिला है। उच्च पद पर नियुक्त शिक्षाकर्मियों की निम्न पद पर सर्विस पीरियड काउंट किये जाने पर सस्पेंस खड़ा हो गया है। ये प्रदेश के उन हजारों शिक्षाकर्मियों के सबसे बड़ा झटका है, जो उच्च पद पर काम कर रहे हैं और निम्न पद पर अपने सर्विस पीरियड को काउंट कर फिलहाल 8 साल के टाइम बांड प्रमोशन के हकदार हो गये थे।…लेकिन समतुल्य वेतनमान का इंतजार कर रहे शिक्षाकर्मियों को राज्य सरकार ने बड़ा झटका देते हुए हाईकोर्ट से मिली राहत को डबल बेंच में चैलेंज कर दिया है। लिहाजा वो शिक्षाकर्मी जिन्हे दोनों पीरियड को जोड़कर 8 साल के बाद समतुल्य वेतनमान का लाभ मिलना था वो अब फैसले आने तक के लिए टल गया है। हालांकि इस अपील पर अभी तक हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू नहीं हुई है।

दरअसल 28 नवंबर 2017 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने एक रूल आर्डर किया था, जिसके निम्न पद पर काम करते हुए यानि वो शिक्षाकर्मी जिन्होंने वर्ग-3 से वर्ग दो में या वर्ग दो से वर्ग-एक में ज्वाइन किया था…उनका निचले पद पर किये काम सर्विस पीरियड को काउंट करने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया था, भले ही उन्हें जिला पंचायत या जनपद पंचायत ने स्वीकृति दी हो या ना दी हो। ये आदेश उन हजारों शिक्षाकर्मियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं था, क्योंकि पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर शिक्षाकर्मियों ने वर्ग तीन से दो…और वर्ग दो से वर्ग में ज्वाइनिंग की थी, कुछ जिलों में पंचायत व जनपद ने शिक्षाकर्मियों को परमिशन दी थी, कुछ जिलों में नहीं दी थी.. लेकिन हाईकोर्ट के नवंबर में आये आदेश के बाद निचले पद में किये काम को सर्विस पीरियड में काउंट करने का आदेश जारी हो गया था, जिसके तहत कई शिक्षाकर्मियों को समतुल्य वेतनमान मिलना था, लेकिन अब वो नहीं मिल पायेगा।

इस आदेश के आधार पर पूरे प्रदेश में शिक्षाकर्मियों ने हाईकोर्ट की रूलिंग के आधार पर प्रमोशन के लिए आवेदन शुरू कर दिया..। जिलों में आये आवेदन के बाद कुछ जिलों ने पंचायत विभाग से मार्गदर्शन मांगा, जिसके बाद पंचायत विभाग ने जिलों को पत्र जारी करते हुए ये साफ किया है कि 28 नवंबर के सिंगल बेंच के आदेश को राज्य सरकार ने डबल बेंच में अपील किया है..। जाहिर मामला डीबी बेंच में चले जाने के बाद उन हजारों शिक्षाकर्मियों का प्रमोशन अब फैसले आने तक के लिए रूक जायेगा।

इस मामले में छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा के मुताबिक

“वे तमाम शिक्षाकर्मी साथी जिन्होंने निम्न वर्ग से उच्च वर्ग पर पहुंचकर अपनी योग्यता के दम पर नौकरी हासिल की थी फिर चाहे उनके पास अनुमति हो या न हो लाभ के हकदार थे और माननीय न्यायालय ने इस विषय में स्पष्ट निर्णय दिया था इसके बावजूद सरकार ने कर्मचारी हितों की अनदेखी करते हुए और अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उनके लाभ को कृत्रिम रूप से टालने की कोशिश की है और इसी के परिणामस्वरूप यह पत्र सामने निकलकर आया है जिसमे फिर से मामले को डबल बैंच में चुनौती देने का उल्लेख है। इस कठिनाई के दौर में हम अपने पीड़ित शिक्षाकर्मी साथियों के साथ हैं और हर लड़ाई में उनका पूरा साथ देंगे”

वहीं प्रदेश मीडिया प्रभारी विवेक दुबे ने कहा है कि

“सरकार के विरुद्ध लंबी लड़ाई लड़कर माननीय न्यायालय से जीत हासिल करने वाले शिक्षाकर्मियों के लिए यह तगड़ा झटका है , शिक्षाकर्मी साथी अपने निजी खर्च पर शासन के विरुद्ध लंबी लड़ाई लड़ने के बाद जीत कर आए थे जिसके बाद उन्हें लाभ की उम्मीद बनी थी लेकिन शासन ने उनकी उम्मीदों पर कुठाराघात कर दिया है, जिस प्रकार से लगातार शिक्षा कर्मियों के विरुद्ध आदेश जारी हो रहे हैं वह पूरे शिक्षक पंचायत संवर्ग को चिंतित और परेशान करने वाले हैं और इस दौर में हम सभी शिक्षाकर्मी साथी एक हैं और इसके विरुद्ध मिलकर लड़ाई लड़ेंगे”

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काका खबरीलाल

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