कांकेर

प्रश्नपत्र-उत्तरपुस्तिका डाउनलोड-प्रिंट कराने व पोस्टऑफिसों में पोस्ट करने लंबी लाइन    

कांकेर  (काकाखबरीलाल  ).    कोरोना के चलते काॅलेज परीक्षाओं की पद्धति बदली गई है जिसमें छात्रों को अतिरिक्त खर्च तो उठाना ही पड़ रहा है और पोस्ट आफिसों में लंबी लाइन भी लगानी पड़ रही है जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है। कम्प्यूटर सेंटरों में प्रश्नपत्र-उत्तरपुस्तिका डाउनलोड और प्रिंट कराने भीड़ उमड़ रही है, फिर उसे पोस्ट करने पोस्टआफिसों में फिर से लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। दोनों जगह छात्रों को पैसे अलग खर्च करने पड़ रहे हैं। जितने विषय की परीक्षा होगी उतने बार कंप्यूटर सेंटर व पोस्ट आफिसों में लाइन लगानी पड़ेगी। छात्र को जिस विषय की परीक्षा तिथि नियत है उस दिन उसी विषय का प्रश्नपत्र डाउनलोड कर प्रिंट कराना है। औसतन एक प्रश्नपत्र में 3 से 6 पेज होते हैं। प्रति पेज 10 रुपए दर से यहां 30 से 60 रुपए चुकाने होते हैं। इसके बाद उत्तरपुस्तिका सेट बाजार में 50 रुपए में बिक रहा है। फिर बड़ा लिफाफा लेना होता है जो बाजार में 15 से 20 रुपए में मिल रहा है। इसके बाद कुरियर/स्पीडपोस्ट/रजिस्ट्री करने में 30 से 50 रुपए खर्च आता है। एक पेपर देने औसतन 150 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। 8 पेपर हुए तो छात्रों की जेब में 1200 की चपत लग जाएगी। परीक्षा फीस के नाम छात्रों से पहले 1500 से 1800 रुपए लिए गए थे। अब इस नई पद्धति से परीक्षा दिलाने छात्रों को 1200 से 1500 रुपए तक खर्च आ रहा है। बीएससी के प्राईवेट परीक्षार्थी मुकेश सिन्हा ने कहा पहले 1800 रुपए परीक्षा फीस जमा कर चुके हैं लेकिन अब डाउनलोड तथा पोस्ट करने के नाम उतने ही पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। परीक्षा फीस वापस करना चाहिए। बीए के छात्र भूपेंद्र सिंग, पंकज शोरी ने कहा इस परीक्षा पद्धति बेहतर कोविड गाइडलाइन का पालन कराते कालेजों में ही परीक्षाएं लेनी थी। बीएससी की निशा नेताम, बीए की टिकेश्वरी बघेल, बीएससी के कृष्णा डोंगवार ने पोस्टऑफिस में लंबी लाइन लगाने के अलावा इसमें खर्च भी आ रहा है। इससे बेहतर काॅलेजों में ही उत्तरपुस्तिकाएं जमा करानी थी, जहां पोस्ट करने का खर्च नहीं आता। काॅलेज कैम्पस बड़ा होता है जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते उत्तरपुस्तिका जमा करना सुविधाजनक होता। पोस्टऑफिसों में जगह नहीं होने और लंबी लाइन लगने से संक्रमण फैलने का खतरा है।
बीकाम व बीए के 8 पेपर होते हैं। बीएससी में 9 पेपर होते हैं। एमए, एमकाम तथा एमएससी में 4 से 5 पेपर होते हैं। काॅलेज के नियमित छात्रों में केवल फाइनल के छात्रों को इस पद्धति से परीक्षा देनी है जबकि सभी स्वाध्यायी छात्रों को इसी पद्धति से परीक्षा देनी है।

कम्प्यूटर सेंटरों में प्रश्नपत्र-उत्तरपुस्तिका डाउनलोड-प्रिंट कराने व पोस्टऑफिसों में पोस्ट करने लंबी लाइन लग रही है। लाइनें इतनी लंबी की सोशल या फिजिकल डिस्टेंसिंग संभव ही नहीं उल्टे धक्कामुक्की की स्थिति बनी रहती है।
‌ग्रामीण क्षेत्र के छात्र हाॅस्टल-किराए के मकानों से वापस गांव लौट चुके हैं। गांव में इंटरनेट समस्या के अलावा पोस्ट कराने सुविधा नहीं होने से दोनों कामों के लिए बार-बार शहर आना पड़ रहा है।

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छत्तरसिंग पटेल

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