खरसिया

नव सृजन साहित्य एवं कला मंच खरसिया द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर छतीसगढी़ कविता पाठ व विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया

-डिग्रीलाल जगत

खरसिया । नव सृजन साहित्य एवं कला मंच खरसिया द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना के 20 वें वर्ष गांठ के अवसर पर 1 नवम्बर को छत्तीसगढ़ी कविता पाठ एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इस दौरान उपस्थित अंचल के कवियों ने छत्तीसगढ़ी में सृजित अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देकर एक अलग अंदाज में राज्य स्थापना दिवस मनाया।

नगर के हमाल पारा स्थित माध्यमिक शाला परिसर में नव सृजन साहित्य एवं कला मंच के सौजन्य से आयोजित इस छत्तीसगढ़ी कविता पाठ एवं विचार गोष्ठी में सर्वप्रथम मंचासीन अतिथियों द्वारा माँ शारदे एवं छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र पर दिप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित मंचस्थ अतिथि के रूप में वरिष्ठ व्याख्याता, कवयित्री श्रीमती गीता जायसवाल, नवसृजन मंच के संस्थापक अध्यक्ष डिग्री लाल जगत”निर्भीक”, वरिष्ठ प्रधान पाठक एवं साहित्यकार रामकुमार पटेल, समाजसेवी गुलाब राम डनसेना, श्री भारती एवं आनंद त्रिवेदी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के प्रथम पाली में छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति, तीज त्यौहार के संरक्षण, विकास एवं प्रचार- प्रसार में साहित्यकारों का योगदान विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें विस्तृत चर्चा की गई। छत्तीसगढ़ी भाषा राजकाज का भाषा बने, और सभी से इसे आगे बढ़ाने के लिए योगदान देने की बात कही गई। पढ़े लिखे लोगों द्वारा अपनी बोली भाषा संस्कृति की अनदेखी करने पर खेद प्रकट करते हुए कहा गया कि बोली भाखा संस्कृति, छत्तीसगढ़ अस्मिता की पहचान और शान है, जिसे हर हाल में आगे बढाने का दायित्व हर छत्तीसगढ़िया का है। साथ ही साहित्य लेखन में नवाचार, चिंतन्युक्त, बोधगम्य, संदेशपरक, बातें समावेश करने पर जोर दिया गया। चर्चा में आनंद त्रिवेदी, हर प्रसाद ढेंढे, डिग्री लाल जगत, रामकुमार पटेल, गीता जायसवाल और गुलाब कंवर ने भाग लेकर अपने विचार रखे।

इसके पश्चात द्वितीय पाली में छत्तीसगढ़ महतारी की शान में छत्तीसगढ़ी कविता पाठ का आयोजन किया गया।
सर्व प्रथम सुमधुर कंठ की गायिका, कवयित्री शुभदा रानी राठौर ने अपनी प्रस्तुति देते हुए कार्यक्रम में छटा बिखेरा। उनके गीत के बोल थे -“अामा अउ लिमवा के छांव, नरवा के तीर मोर गांव।” और “मोर जियरा म आगी लगाय।” कवि केशव खंडेल ने सतनाम की महिमा _”सतनाम हवय सार, बहे गंगा कस धार” संदेश परक गीत प्रस्तुत किया।मंच कोषाध्यक्ष हर प्रसाद ढेंढे ने पुराने गीत एवं गीतकारों की रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए “मोर अंगना म भारत माता के”
की प्रस्तुति अपने अंदाज में प्रस्तुत किया। संयोजक कवि गुलाब सिंह कंवर “गुलाब” ने अपनी छत्तीसगढ़ी रचना “छत्तीसगढ़ के बेटा अंव, जेकर बड़ गुमान हावय।” और “छत्तीसगढ़ के माटी, महानदी के घाटी।” सुनाकर माहौल को खुशनुमा बनाया। मंच के वरिष्ठ उपाध्यक्ष खेलन कैवर्त ने छत्तीसगढ़ के सुंदरता, मया प्रेम, को दर्शाते हुए “मया परेम के बोली हे। अजब गजब ठिठोली हे” कविता पाठ किया। कवि आनंद त्रिवेदी “आनंद” ने पुरानी बातों की याद ताजा करते हुए हास्य से सराबोर कविता डोकेरा-डोकरी के गोठ “आंट म डोकरा कांतत ढेरा, करत रहे ठिठोली” प्रस्तुत किया। युवा कवि प्रवीण चतुर्वेदी “मधु पुष्प” ने सुमधुर आवाज में छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना “छत्तीसगढ़ के हरियर भुइंया” प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति काफी सराहनीय थी। वीरेन्द्र कुमार पटेल युवा कवि ने भी छत्तीसगढ़ी में प्रेरणा दायक रचना प्रस्तुत किया। वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती गीता जायसवाल ने “पथरा के देवता”, और बालिका शिक्षा पर सुंदर कविता प्रस्तुत किया। कवि पत्रकार डिग्री लाल जगत “निर्भीक” ने साहित्यकारों को जागृत करते हुए कविता “कलम के सिपाही तंय जागत रहिबे” प्रस्तुत किया। गुलाब डनसेना ने प्रेरणादायक जाग्रति के गीत गाए। श्री भारती ने ज्ञानवर्धक उद्बोधन दिया और क्षणिका पाठ किया। अन्तिम प्रस्तुति के रूप में रामकुमार पटेल ने सुआ गीत के तर्ज पर स्वरचित गीत गाकर माहौल को उत्साह वर्धक बना दिया और सभी को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। उनके गीत के बोल थे “धन्य हे हमर छत्तीसगढ”।

कार्यक्रम का सफल संचालन युवा कवि एवं नवसृजन मंच का मीडिया प्रभारी प्रवीण चतुर्वेदी “मधु पुष्प” ने किया। हंसी-खुशी भरे माहौल में देर शाम तक छत्तीसगढ़ी कविता की रसधार बहती रही। अंत में मंच के संयोजक गुलाब सिंह कंवर “गुलाब” ने सभी का आभार प्रगट किया।

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छत्तरसिंग पटेल

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