पूर्व न्यायधीश और कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर लगाये गंभीर आरोप..!

छत्तीसगढ़ – पूर्व न्यायाधीश एवं कांग्रेस नेता प्रमोद परस्ते ने भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार पूँजीपतियों की सरकार बताते हुए कहा कि एक बड़े षड्यंत्र के तहत शातिराना ढंग से आदिवासियों की जमीन, जंगल और पहाड़ों को उद्योगपतियों को सौपने के लिए छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने भू राजस्व संहिता में संशोधन कर दिया जिससे वे आदिवासियों की भूमि को सरलता से अधिग्रहित कर सके । सरकार आदिवासियों की भूमि संरक्षित करने के बजाय उसका तोड़ निकलने में लगी है ।
ठीक इसके विपरीत कांग्रेस की केंद्र सरकार ने 1996 में पेसा कानून और 2006 में वैन अधिकार कानून बनाकर वनभूमि जोकि आदिवासियों की प्राकृतिक रहवास है, वहाँ बसने का अधिकार दिया ताकि प्रकृति और पर्यावरण दोनो संरक्षित हो सके वही दूसरी ओर भाजपा सरकारों की नजर आदिवासियों की जमीन जंगल और पहाड़ों पर गड़ी हुई है ।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि आदिवासी क्षेत्रों में उनकी जमीन के नीचे पाए जाने वाले खनिज पर भी भूमि स्वामी का अधिकार होगा । 1997 को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार जिसे हम समता जजमेन्ट भी कहते है अनुसूचित जनजाति एवं वन क्षेत्रों में खनन व उद्योग पर रोक लगा रखी है । छत्तीसगढ़ 5 वी अनुसूची का राज्य है जिसमे भी यह स्पष्ट उल्लेखित है कि अनुसूचित क्षेत्र में कोई उत्खनन या उद्योग संचालित नही किये जा सकते । ठीक इन संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत राज्य सरकार आदिवासियों की भूमि के सरल अधिग्रहण हेतु संशोधन की है जोकि गलत और आदिवासियों के हितों के विरुद्ध है जिसका आदिवासी समाज घोर निंदा करता है । संशोधन वापस लिया जाय । बल्कि सरकार को तो ये चाहिए कि ऐसा कानून बनाये जिससे आदिवासियों की ऐसी भूमि जिसे गैर आदिवासियों के द्वारा किसी अन्य आदिवासी के नाम पर क्रय कर काबिज है उसका भौतिक सत्यापन कर गैर आदिवासियों से खाली कराया जाये ।

























