यहां के जंगल सफारी में दिखा दुर्लभ ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर

रायपुर। नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी के बॉटेनिकल गार्डन में पक्षी प्रेमियों और प्रकृति संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए सुखद खबर सामने आई है। हाल ही में आयोजित बर्ड वॉक के दौरान वन्यजीव छायाकारों ने भारत के सबसे छोटे कठफोड़वों में से एक दुर्लभ ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर को कैमरे में कैद किया। तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में इस पक्षी की मौजूदगी को जैव विविधता संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जंगल सफारी और बॉटेनिकल गार्डन जैव विविधता संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। यहां का संरक्षित हरित क्षेत्र अनेक पक्षियों और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्लभ पक्षियों की बढ़ती उपस्थिति संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।
ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर भारत के सबसे छोटे कठफोड़वों में शामिल है। इसकी लंबाई लगभग 13 से 15 सेंटीमीटर होती है। सिर पर भूरे रंग का मुकुटनुमा भाग और शरीर पर काले-सफेद धब्बेदार पंख इसकी प्रमुख पहचान हैं। यह पक्षी पेड़ों की छाल पर तेजी से चढ़ने-उतरने और अपनी फुर्तीली गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी इस पक्षी की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह अपनी नुकीली चोंच से पेड़ों की छाल में छिपे हानिकारक कीटों और लार्वा को खाकर वृक्षों को स्वस्थ रखने में मदद करता है, इसलिए इसे पेड़ों का प्राकृतिक संरक्षक भी कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्यतः यह पक्षी घने और शांत जंगलों में पुराने वृक्षों पर पाया जाता है। ऐसे में शहरी क्षेत्र के बीच स्थित जंगल सफारी और बॉटेनिकल गार्डन में इसकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि यहां का पारिस्थितिकी तंत्र वन्यजीवों के लिए अनुकूल बन रहा है। यह उपलब्धि प्रकृति संरक्षण और हरित विकास के सफल प्रयासों का प्रमाण मानी जा रही है।
ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर का यह रिकॉर्ड न केवल छत्तीसगढ़ की पक्षी विविधता को समृद्ध करता है, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा भी देता है।































