श्री गोविंद कमला गौधाम ने पेश की मानवता की मिसाल, घायल वानर की बचाई जान : प्रशासन की सुस्ती के बीच देवदूत बना गौधाम, जबड़ा टूटने और आंख फूटने के बावजूद 6 दिन तक चला उपचार

- श्री गोविंद कमला गौधाम ने पेश की मानवता की मिसाल, घायल वानर की बचाई जान
- प्रशासन की सुस्ती के बीच देवदूत बना गौधाम
- जबड़ा टूटने और आंख फूटने के बावजूद 6 दिन तक चला उपचार
- 100 किमी के दायरे में बेजुबानों के लिए इकलौता सहारा बना श्री गोविंद कमला गौधाम
नंदकिशोर अग्रवाल, काकाख़बरीलाल @पिथौरा। नेशनल हाईवे 53 पर रफ्तार के कहर ने एक बार फिर वन्यजीवों के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया, लेकिन इस हादसे के बीच पिथौरा के ‘श्री गोविंद कमला गौधाम’ ने सेवा और समर्पण की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा सर्वत्र क्षेत्र में हो रही है।
लगभग 6 दिन पूर्व नेशनल हाईवे पर एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की चपेट में आने से दो वानर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हृदयविदारक घटना में एक नन्हे वानर की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि दूसरा वानर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था।
श्री गोविंद कमला गौधाम के संचालक मनीष अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि अज्ञात वाहन से हुए हादसे की सूचना मिलते ही श्री गोविंद कमला गौधाम की रेस्क्यू टीम तत्काल मौके पर पहुंची। घायल वानर की स्थिति अत्यंत नाजुक थी और उसके मुंह से लगातार खून बह रहा था। सेवाभावी मनीष अग्रवाल ने बताया कि जब वानर को गौधाम लाकर चिकित्सकों और सेवादारों ने गहन जांच की, तो पता चला कि दुर्घटना इतनी भयानक थी कि वानर का जबड़ा पूरी तरह टूट चुका था और उसकी एक आंख भी फूट गई थी।
इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद श्री गोविंद कमला गौधाम के सदस्यों ने हार नहीं मानी और मूक जीव का उपचार प्रारंभ किया। लगातार 6 दिनों तक गहन चिकित्सा और अटूट सेवा के बावजूद जब वानर ने भोजन ग्रहण करना शुरू नहीं किया, तब स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया। शुरुआत में विभाग की ओर से अपेक्षित मदद न मिलने के बाद, जब मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया।
वन मंडल अधिकारियों की मौजूदगी में घायल वानर को आगे के विशेषज्ञ उपचार के लिए सुरक्षित रूप से जंगल सफारी, रायपुर भेजा गया है। मनीष अग्रवाल और गौधाम की टीम के इस प्रयास ने यह साबित कर दिया कि यदि सच्ची इच्छाशक्ति हो, तो संसाधनों की कमी भी सेवा के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती।
100 किमी क्षेत्र में उम्मीद की किरण बना श्री गोविंद कमला गौधाम
सर्वविदित हो कि पिथौरा क्षेत्र से लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में जब भी कोई बेजुबान प्राणी दुर्घटना का शिकार होता है या उसे मदद की जरूरत होती है, तो लोगों की जुबान पर सबसे पहला नाम ‘श्री गोविंद कमला गौधाम’ का ही आता है। सरकारी तंत्र की धीमी गति के विपरीत, यह गौधाम आज एक प्रमुख उपचार केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है, जहाँ के समर्पित सेवादार अपनी जान की परवाह किए बिना बेजुबानों की सेवा में डटे रहते हैं। वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने मनीष अग्रवाल एवं उनकी पूरी टीम के इस पुनीत कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।





























