छत्तीसगढ़

मनरेगा से मिला पशु शेड, डेयरी व्यवसाय से बढ़ी आय और बदली जिंदगी

मेहनत यदि सही दिशा में की जाए और समय पर सहयोग मिल जाए तो सफलता निश्चित हो जाती है। ऐसा ही उदाहरण जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर अंतर्गत ग्राम कसरा निवासी रामसुभग ने प्रस्तुत किया है, जिन्होंने मनरेगा योजना की मदद से अपने पारंपरिक पशुपालन कार्य को स्वरोजगार में बदलकर आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।

मनरेगा से मिला पशु शेड, डेयरी व्यवसाय से बढ़ी आय और बदली जिंदगी

रामसुभग का परिवार पहले से ही दुधारू पशुओं का पालन कर अपनी आजीविका चलाता था, लेकिन पशुओं के लिए उचित शेड और संसाधनों की कमी के कारण वे दो.तीन पशुओं से अधिक नहीं पाल पाते थे। मात्र एक एकड़ कृषि भूमि और सीमित दुग्ध उत्पादन पर निर्भर रहने से परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहती थी।

रामसुभग ने बताया कि ग्राम पंचायत में आयोजित ग्राम सभा में उन्होंने पशु शेड निर्माण की मांग रखी थी। ग्राम सभा से अनुमोदन मिलने के बाद मनरेगा योजना के तहत लगभग सवा लाख रुपये की लागत से उनके लिए पक्का पशु शेड स्वीकृत किया गया। शेड निर्माण के बाद अब हर मौसम में पशुओं की देखभाल और संरक्षण में काफी सुविधा हो गई है।

उन्होंने बताया कि अब उनके पास साहीवाल नस्ल की चार गायें हैं और कुल मिलाकर आधा दर्जन उन्नत दुधारू पशुओं का पालन किया जा रहा है। गर्मियों के मौसम में भी प्रतिदिन लगभग 20 से 25 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा हैए जिसे वे आसानी से बैकुण्ठपुर जिला मुख्यालय में बेच लेते हैं।

डेयरी व्यवसाय से अब उन्हें प्रतिदिन लगभग एक हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और पशुपालन उनके लिए स्थायी स्वरोजगार का माध्यम बन गया है।

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काका खबरीलाल

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