धान कटाई के बाद खेतों में बचे ठूँठ को जलाने वालों पर हो सकती है कार्यवाही..

विगत वर्ष 30 लोगों से वसूला गया था ₹75000 का जुर्माना
काकाखबरीलाल,सरायपाली। खरीफ फसल कटने के बाद रबी फसल की तैयारी के लिए अधिकतर किसान हार्वेस्टर से कटाये धान के पैरा, ठूँठ एवं खर पतवार को आग के हवाले कर खेतों को तैयार करते हैं, ताकि उसमें रबी के लिए थरहा लगाया जा सके. लेकिन किसान खेतों को जल्द तैयार करने के चक्कर में यह भूल जाते हैं कि उनके द्वारा खेत को आग लगाने से जमीन उपजाऊ नहीं बल्कि अनुपजाऊ हो जाती है. ऐसा करते हुए उन्हें शासन के द्वारा की जाने वाली कार्यवाही का भी भय नहीं रहता. इस वर्ष पुन: कुछ स्थानों पर किसानों के द्वारा खेतों में आग लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है. विगत वर्ष तो खेतों को आग लगाने वाले 30 किसानों से तत्कालीन एसडीएम नुपुर राशि पन्ना के द्वारा 75 हजार रू की जुर्माना राशि भी वसूल की गई थी. अब देखना यह है कि प्रशासन इस वर्ष किस प्रकार कार्यवाही करती है.
प्रतिवर्ष खरीफ फसल के बाद अधिकतर खेतों में मशीन से धान की कटाई होती है, जिससे खेतों में ही पैरा पड़ा रहता है. कुछ जगह तो किसान स्वयं खेत की सफाई के लिए पैरा को आग लगा देते हैं, तो कुछ जगह उपद्रवियों के कारण खेतों में आग लग जाती है. लेकिन उनके द्वारा खेतों में पड़े पैरा एवं ठूँठ को आग लगाने से मवेशियों को चारा भी नसीब नहीं होता और खेतों के मित्र कीट जीवाणु भी मर जाते हैं. साथ ही खेतों में कार्बन की मात्रा अधिक हो जाती है, जिससे जमीन की मिट्टी कठोर हो जाती है और उर्वरा शक्ति कम हो जाती है. ग्रामीण अंचलों में फसल कटने के बाद पशुपालक राहत की सांस लेते हैें और अपने मवेशियों को चरने के लिए छोड़ देते हैं. लेकिन खेतों में आग लगने के बाद मवेशी भी चारा के लिए तरसते हैं.
कृषि विभाग से मिली जानकारी अनुसार शासन के द्वारा इस प्रकार आग लगाने वालों के लिए दण्ड का प्रावधान भी किया गया है. जिसमें 6 माह से 2 वर्ष तक की जेल के अलावा खेतों के ढाई एकड़ रकबे में आग जलाने वाले किसान से ढाई हजार, पाँच एकड़ से 5 हजार एवं पाँच एकड़ से अधिक में आग लगाने वाले किसानों से 10 हजार रूपये तक जुर्माने का प्रावधान है. यदि एक बार जुर्माना देने के बाद पुन: वही गलती दोहराता है तो उनसे दोबारा जुर्माना भी वसूला जाना है.
अवशेष को न जलाने वालों के लिए प्रोत्साहन राशि का भी है प्रावधान
जो किसान खेत में पड़े फसलों के अवशेष को नष्ट नहीं करते और उसे उपयोग में लाते हैं (जैसे पैरा को फैलाकर खेत में ही खाद बनाना या अन्य तरह के उपयोग)तो उन्हें प्रति एकड़ एक हजार रूपये प्रोत्साहन राशि भी दिया जाना है. विगत वर्ष जुर्माने की कार्यवाही का असर इस वर्ष भी देखने को मिल सकता है और किसान आग जलाने के प्रति सचेत हो सकते हैं. किसानों को भी अपने खेतों की उर्वरा शक्ति को बनाये रखने एवं मवेशियों को चारा उपलब्ध कराने तथा आग लगाने से होने वाले अन्य नुकसानों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है.




























