
संभावनाओं से भरा भंवरपुर अब फिर से नये सम्भावनाओं की तलाश में जुट गया है जी हां….. जिले के सबसे बड़े गांव और पंचायत भंवरपुर में कल विपक्षीयों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव 16/00 मतों से और पुर्ण बहुमत से पास हो चुका है जबकि प्रतीक सरपंच के पक्ष में शून्य वोट पड़े हैं जिससे उनकी हार हो चुकी है। कुल 20 पंचों में महज 04 पंच जो बच गए वो वोट डालने गए ही नहीं। एक तरफ विपक्षियों द्वारा जीत का जश्न है दूसरी तरफ सरपंच या पूर्व सरपंच प्रतीक देवांगन और उनकी समर्थकों की आंखे नम है और जुबान पर प्रतीक देवांगन जिंदाबाद के नारे हैं।
भंवरपुर की आवाम का रुख बदल चुका है भंवरपुर के इतिहास में पहली बार यह अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। प्रतीक देवांगन अपने सरपंची से हाथ धो बैठे हैं वहीं दूसरी ओर भंवरपुर का राजीनीति भविष्य बहुत कठिन नजर आ रहा है। हर गली – नुक्कड़- चौंक – चौराहों पर बस इसी की चर्चा हो रही है सरपंच की निष्क्रियता या
कोई कहता है एक समाज विशेष का एकजुटता कोई कहता है निजी मामलों में दखल देना महंगा पड़ा… अब यह जो भी मामला हो जिसको जाना था वह तो चला गया…।
16 पुर्ण बहुमत के साथ पारित हुआ अविश्वास प्रस्ताव से यह साफ हो चुका है कि भंवरपुर का भविष्य अब किसी और के हाथों आने वाला है। वहीं सरपंच समर्थित 04 पंचों ने यह आरोप लगाया है कि उन्हें वोट डालने के लिए अंदर जाने ही नहीं दिया गया… अब यह आरोप कितना सहीं, कितना झूठ यह तो नहीं पता पर जब अविश्वास प्रस्ताव पारित हो रहा था तब सरपंच समेत 04 पंच एंव उनके देवांगन समाज के समर्थकों ने मेन रोड पर रानीसागर तालाब के पास घण्टों जमकर हंगामा किया और प्रतीक देवांगन जिंदाबाद के नारे भी लगाए लेकिन अब इन नारों एंव समर्थकों का कोई वजूद ही नहीं है अब जब सरपंची ही हाथों से चली गयी।
भंवरपुर के राजीनीति गलियारों में हलचल
लोगों के द्वारा यह भी चर्चा किया जा रहा है कि कांग्रेसी जनों के लिए इससे बढ़कर दुःखद बात क्या होगी कि एक कांग्रेसी समर्थित सरपंच को अपने पद से हाथ धोना पड़ गया….
आपको बताते चलें कि सरपंच के साथ क्षेत्रीय विधायक जी कई बार मंच साझा करते हुए भी नजर आ चुके हैं साथ ही कांग्रेसी समर्थित सरपंच प्रतीक देवांगन का अविश्वास प्रस्ताव में बुरी तरीके से हार जाना एक समाज विशेष में गुट एंव राजनीतिक दो फाड़ होने के आसार दिखाई दे रहें हैं प्रतीक देवांगन के समर्थन में एक तरफ देवांगन समाज सड़क पर खड़ा हुआ नजर आया, प्रतीक देवांगन एंव उनके देवांगन समाज के समर्थकों के द्वारा विपक्षी समाज पर तंज कसता नजर आया तो दूसरी तरफ विपक्षियों में खासा उत्साह एंव हर्ष नजर आया अविश्वास प्रस्ताव के जीत के जश्न में फटाके भी फूटने ही वाले थे की रुकवाया गया लेकिन अब यह फटाखा आगामी 6 महीनों के अंदर किसके नाम से फूटेगा यह तो भंवरपुरिया लोगों के भविष्य में है…. अब भंवरपुर की राजनीतिक दो गुटों में फाड़ हो चुकी हैं ऐसा हम नहीं कह रहें हैं यहां की जनता जनार्दन का मूड और प्रतिक्रिया बता रहा है.. सूत्रों की माने तो नये – नये किस्से कहानियां सुनने को मिल हीं रहें हैं… चलिए अब मिलते हैं अगली कड़ी में… जर्नलिस्ट विजय कुमार,,,,(काका खबरीलाल)

























