छत्तीसगढ़

साढ़े 3 हज़ार से ज्यादा कांटा झाड़ू बिके, सुदूर ग्रामीण क्षेत्र जनकपुर के प्रगति समूह को मिला 40 हजार से ज्यादा का लाभ’

सघन वनांचल कोरिया जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों के लिए वनोपज आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम है। विभिन्न लघुवनोपज जैसे माहुल पत्ता, हर्रा कचरिया, बहेड़ा, रंगीनी लाख, बेलगुदा, चिरौंजी गुठली, महुआ फूल, इमली, सालबीज आदि के साथ यहाँ उत्तम गुणवत्ता के कांटा झाड़ू घास की भी प्रचुरता है। विकासखण्ड भरतपुर के जनकपुर की प्रगति स्व सहायता समूह की महिलाएं कांटाझाड़ू घास संग्रहण द्वारा कांटा झाड़ू निर्माण कर आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं।
घरेलू कार्य करने वाली महिलाओं के लिए कांटा झाड़ू स्वरोजगार का उत्तम माध्यम बन गया है। समूह की अध्यक्ष पिंकी ने बताया कि समूह द्वारा अब तक लगभग 4 हजार 545 कांटा झाड़ू का निर्माण किया गया है, जिसमें से 3 हजार 840 झाड़ू 1 लाख 50 हजार 600 रुपए में विक्रय किया गया है। विक्रय से महिलाओं को कुल 41 हजार 928 रूपए का शुद्ध लाभ हुआ है, समूह को झाड़ू निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री तार, प्लास्टिक, झाड़ू घास की पूर्ति बिहान के सहयोग से हो रही है। निर्माण से लेकर पैकेजिंग तक का काम महिलाओं द्वारा स्वयं किया जा रहा। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा निर्धारित दर पर काटा झाड़ू की खरीदी की गई हैं वहीं समूह द्वारा स्थानीय बाज़ारों, सी मार्ट सहित पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में भी विक्रय हेतु झाड़ू भेजी जा रही है।

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छत्तरसिंग पटेल

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