रायपुर

जिंदगी एक कहानी : कोरोना महामारी से पटरी पर उतरी जिंदगी, मजबूरी ने हाथ में थमा दी ठेला और फावड़ा

रायपुर (काकाखबरीलाल). जिंदगी एक कहानी ही है। इसमें उतार-चढ़ाव, खुशी-गम आते और जाते हैं। पूरी दुनिया में कहर बरपाने वाली कोरोना महामारी ने हम सबकी जिंदगी में गम ही ज्यादा दिए हैं। कुछ का सबकुछ उजड़ गया, कुछ की जिंदगी का कुछ हिस्सा उदास हो गया है। कुछ ऐसे भी हैं जिनकी जिंदगी का अंदाज ही बदल गया है।

छालीवुड की ग्लैमर वाली दुनिया से जुड़े सैकड़ों कलाकारों, तकनीशियन, मैकअपमैन फाइट मास्टर और जूनियर कलाकारों की जिंदगी के सुनहरे पल इस महामारी ने चुरा लिए हैं। कभी चकाचौंध में रहने वाले कलाकार इस वक्त अपना घर चलाने के लिए सब्जी, फल बेचने के साथ दिहाड़ी मजदूरी का काम करना कर रहे हैं। कुछ कह पाए, कुछ लोकलाज की वजह से खामोश ही रह गए। बोले-जाने दीजिए…विपदा में आई विपन्नता का मखौल ही उड़ेगा। कोई मदद नहीं करता आजकल, न सरकार न अपने साथी।

टूरी नंबर वन सहित कई फिल्मों में प्रोडक्टशन का काम देखने वाले सुरेश साहू को इस समय सब्जी का ठेला लगाकर अपना परिवार पालना पड़ रहा है। वे बताते हैं किसी तरह घर चल रहा है। उनके परिवार में पत्नी दो-दो बच्चों के साथ माता और पिता भी हैं। इसी तरह एक और कलाकार ललित उपाध्याय आलू प्याज बेचने का काम कर रहे हैं। श्री उपाध्याय ने बताया, वे सौ से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं।

जौहार छत्तीसगढ़, दहाड़ जैसी फिल्मों में काम करने के साथ कई छत्तीसगढ़ी, मराठी, भोजपुरी और सिंधी फिल्मों में कलाकारों के चेहरों को संवारने का काम करने वाले संजय टंडन को इस समय दोपहिया सुधारने का काम करना पड़ रहा है। नया रायपुर के निमोरा में रहने वाले इस कलाकार का पूरा जीवन बदल गया है। फिल्मों में काम करने से आसानी से घर चल जाता था, लेकिन इस समय घर चलाना मुश्किल है।

कई छत्तीसगढ़ी फिल्मों में लाइटमैन का काम करने के साथ रोल भी करने वाले सुनील कुमार वर्मा को इस समय अपना घर चलाने के लिए कुली का काम करना पड़ रहा है। लाइटमैन का काम करने में उनको जहां रोज पांच सौ रुपए मिलते थे, वहीं अब महज दो सौ रुपए में काम करना पड़ रहा है।

छत्तीसगढ़ी फिल्मों में डांस कलाकार उपलब्ध कराने का काम मनोज कुमार राजपूत करते थे। कई फिल्मों में उन्होंने और उनके 30 कलाकारों के ग्रुप ने काम किया, लेकिन अब महामारी के कारण जहां श्री राजपूत को फल बेचने पड़ रहे हैं, वहीं उनके एक साथी कलाकार दिलीप कुमार साहू को कुली का काम करना पड़ रहा है। श्री राजपूत बताते हैं उनके ग्रुप के लड़के जहां कुली का काम कर रहे हैं, वहीं लड़कियों को भी घरों में सफाई आदि का काम करना पड़ रहा है।

एक वो दिन थे जब छत्तीसगढ़ी फिल्मों के हीरो, हीरोइन के साथ कलाकारों के चेहरों को संवारने का काम मैकअपमैन चोवाराम साहू करते थे, लेकिन इस समय कोरोना ने यह दिन दिखा दिया है कि अपना परिवार चलाने के लिए राजधानी के बढ़ईपारा की एक आरा मिल में काम कर रहे हैं। एक फिल्म में एक दिन के मैकअप के लिए इनको एक से डेढ़ हजार रुपए मिल जाते थे। एक फिल्म में इनकी कमाई 30 हजार के आसपास हो जाती थी, आज इनको तीन सौ रुपए रोजी पर काम करना पड़ रहा है। जिंदगी ने इस मोड़ पर ला खड़ा किया है कि पुराने दिन लौटेंगे इसका भरोसा भी नहीं रहा।

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छत्तरसिंग पटेल

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