बीजापुर में आदिवासियों पर हुए गोली बारी के विरोध में आदिवासी समाज पिथौरा में आक्रोश, एक सुत्रीय मांग को लेकर अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

मांधाता सिंह ठाकुर/ पिथौरा @काकाखबरीलाल. सुकमा बीजापुर जिले के सरहद पर सिलेगर में पुलिस केम्प खुले जाने का विरोध करते समय पुलिस द्वारा निर्दोष आदिवासीयों पर की गई गोलीबारी से 3 आदिवासी समाज के व्यक्तियों की मौत पर आदिवासी समाज में विरोध गरमा गया है । जगह जगह धरना प्रदर्शन, आंदोलन किए जा रहे हैं। इनकी मांग उच्च स्तरीय जांच किये जाने की है । इसी तारतम्य में आज पिथौरा नगर के एनएच रेस्ट हाउस के सामने धरना देकर महामहिम राज्यपाल के नाम स्थानीय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को ज्ञापन सौपकर अपना विरोध प्रदर्शन करते हुए एक सूत्रीय मांग को लेकर ज्ञापन सौपा ।
बौखलाए आदिवासी समाज ने बस्तर के सुकमा बीजापुर जिले के सरहद में सिलेगर मैं पुलिस कैंप कॉलेज जाने का विरोध हजारों आदिवासियों की भीड़ पर अचानक पुलिस द्वारा गोली चलाया गया था। तथा आंसू गैस के गोले छोड़े गए तथा मारपीट किया गया। जिसमें 3 आदिवासियों की मौत हो गई तथा दर्जनों आदिवासी घायल हो गए थे। समाज द्वारा लिखित ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि आदिवासी लोगों को पुलिस द्वारा नक्सली बताया गया है। और ग्रामीणों के विरोध को नक्सलियों द्वारा प्रायोजित बताया गया है। यह पहली बार नहीं है जब बस्तर संभाग में नक्सली उन्मूलन की आड़ में आदिवासियों की हत्या किया जाता है। कोरोना काल में आदिवासियों की फर्जी मुठभेड़, फर्जी आत्म समर्पण , फर्जी हत्या जैसे अनेक मामले हो चुके हैं । ज्ञापन में आगे यह उल्लेखित है कि छत्तीसगढ़ की पांचवी अनुसूची क्षेत्र में समस्त विधायिका शक्ति आप में निहित है। और छत्तीसगढ़ राज्य के आदिवासियों की संरक्षिका है।
पीड़ितों को 50-50 एवं घायलों को 20-20 लाख मुआवजा की मांग
इनकी मांगों में विशेषकर उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषी पर कार्रवाई करने और मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपए और घायलों को 20-20 लाख रुपए मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज ब्लॉक इकाई पिथौरा धरने पर बैठा।
आज दिए गए धरने में आदिवासी समाज के ब्लॉक अध्यक्ष मनराखन ठाकुर के नेतृत्व में दयाराम बरिहा , दशरथ बरिहा, झगरू राम बरिहा, तुलसीराम दीवान , श्याम कुमार नेताम , जगबंधु कोंद , कृष्णा ध्रुव , ननक ठाकुर , राजू सिंह ठाकुर , वल्लभ सूर्यवंशी , पालेश्वर ठाकुर धरने पर बैठे थे । इसके अलावा अप्रत्यक्ष रूप से सर्व आदिवासी समाज का सहयोग रहा ।


























