प्रतिबंध के बाद पबजी गेम छोड़ गया गुस्सा और बेचैनी, साथ ले गया भूख
रायपुर (काकाखबरीलाल).पबजी (प्लेयर्स अननोन्स बेटल ग्राउंड) गेम पर केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने से इस गेम की लत वाले बच्चे बेचैन हो गए हैं। गुस्सैल और हिंसात्मक प्रवृत्ति के होते जा रहे हैं। उनके रहन-सहन में परिवर्तन आ गया है, पढ़ाई में भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे चिंतित कई अभिभावक काउंसलर और मनोचिकित्सक की मदद ले रहे हैं। काउंसलर के पास रोजाना लगभग 10 फोन आ रहे हैं, जिनमें बच्चों के बदलते रवैये पर अभिभावक चिंता जाहिर कर रहे हैं। हालांकि पबजी गेम के बंद होने से अभिभावक खुश हैं, लेकिन बच्चों-युवाओं के बदले व्यवहार से परेशान हैं।
रोजाना आ रहे 10 फोन, खाना तक न खाने की समस्या
काउंसलर डॉ. वर्षा वरवंडकर ने बताया कि पबजी पर प्रतिबंध लगने के बाद से उन्हें रोजाना औसतन 10 अभिभावक फोन कर रहे हैं, जो बच्चों के रहन-सहन में आए बदलाव पर चिंता जता रहे हैं। कई तरह की समस्या बता रहे हैं। काउंसलर बच्चों से खुद बात कर प्रोत्साहित करती हैं, गेम से होने वाले नुकसान के बारे में बताती हैं। डॉ. वरवंडकर ने बताया कि उनके पास राजेंद्र नगर रायपुर की एक महिला का फोन आया। उसने कहा कि उसका 15 वर्षीय बेटा पबजी पर प्रतिबंध लगने के बाद से खाना नहीं खा रहा है। दो दिन हो गए, अकेले अपने रूम में रह रहा है। काउंसिलिंग के बाद वह मान गया और खाना खाया।
बच्चों को दें समय, अपने साथ व्यस्त रखें
मनोचिकित्सक डॉ. सोनिया परियल का कहना है कि पबजी जैसे गेम के कारण बच्चों में मोबाइल की लत लग रही है। यह लत वैसी ही है, जैसी किसी मादक पदार्थ और शराब की होती है। ऐसे हालात में बच्चों को प्यार से समझाएं। उन्हें अपने साथ दूसरे काम में व्यस्त रखें। अगर बच्चा मोबाइल मांगता है तो उसे समय निर्धारित कर उपयोग करने को दें। अभिभावक बच्चों के साथ ऑनलाइन गेम की जगह घरेलू पुराने गेम्स खेलने की बात करें। मानसिक रूप से उन पर दबाव न बनाएं। इससे उनके दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है।

























