
रायपुर(काकाखबरीलाल )।कोरोना की वजह से सरकार को इस साल जो आर्थिक धक्का लगा और बजट 30 प्रतिशत कम करना पड़ा, उसका असर अगले साल के बजट में भी पड़ने वाला है। शासन ने 2021-22 के बजट के लिए भी सभी विभागों को 10 फीसदी कटौती करने के लिए कह दिया है और उसी हिसाब से प्रस्ताव मांगे गए हैं। यह भी कहा गया है कि सभी सचिव और विभागाध्यक्ष अपने स्तर पर जो प्रस्ताव बनाएंगे, उसमें नई योजनाओं को शामिल नहीं किया जाएगा।
जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अलग-अलग विभागों के मंत्रियों से उनके बजट पर चर्चा करेंगे, उस वक्त मंत्री ही नए प्रस्ताव या योजनाएं रखेंगे। इन्हीं में से जिन पर मुख्यमंत्री की सहमति होगी, उन प्रस्तावों को बजट में शामिल किया जाएगा। सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष यानी 2021-22 के लिए बजट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त विभाग ने शासन के सभी विभागों से आय-व्यय की जानकारी मांगी है।
उन्हें 31 मार्च की स्थिति में गाड़ियों, कम्प्यूटर और टेलीफोन सहित अन्य संपत्ति का ब्योरा देना है। 21 से 31 अक्टूबर तक वित्त विभाग के अधिकारी सभी विभाग प्रमुखों से राजस्व के संबंध में जानकारी जुटाएंगे। इसके बाद 16 नवंबर से 5 दिसंबर तक एचओडी स्तर पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 21 दिसंबर से 31 दिसंबर तक वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव सभी विभाग के सचिवों से बजट पर चर्चा करेंगे। इस दौरान भी उन प्रस्तावों पर ही प्रमुखता से बात की जाएगी, जिनकी स्क्रूटनी हो चुकी होगी। वहीं, राज्य पर बढ़ता कर्ज भी सरकार पर चिंता का सबब बना हुआ है। राज्य पर अब तक करीब 55 हजार करोड़ का कर्ज हो चुका है। इसमें से करीब 17 हजार करोड़ कांग्रेस सरकार ले चुकी है।
केंद्रीय योजनाओं पर ही जोर : कोरोना से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए सरकार इस बार अपनी योजनाएं लाने से परहेज कर रही है। शासन का ज्यादा जोर केंद्रीय योजनाओं को ही धरातल पर लाने का रहेगा, ताकि राज्यांश कम से कम खर्च हो। इसके चलते राज्य के बजट से बड़े पूंजीगत खर्च यानी बड़े पुल-पुलिए,भवन जैसी योजनाएं शामिल नहीं की जाएंगी। अलबत्ता चालू बजट में स्वीकृत ऐसे कामों के लिए राशि अवश्य दी जाएगी।





























