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महाभारत के युद्ध मे शक्ति के प्रतीक भीम सेन की कहानी कहता है दिपावली के साथ राजा भीम सेन के प्रतिमा की झाँकी

जॉन सेमसन(झलप) । पाँच पांडवों और महाभारत के पात्रों में से एक राजा भीम सेन जिनकी शक्ति का जिक्र महाभारत के युद्ध वर्णन में कई बार किया गया है,ऐसे चर्चित पात्र भीम सेन की झाँकी प्रति वर्ष दीपावली के दौरान आदिवासी समुदाय द्वारा गाँव मे निकाला जाता है।रामायण में राम रावण युद्ध और बुराई के रूप में रावण के परास्त होने के साथ महाभारत में बुराई रूपी दुर्योधन के भीमसेन द्वारा वध किया जाना ऐतिहासिक किताबों में पाया जाता है।इस तरह बुराई पर अच्छाई के जीत का जीवन्त वर्णन दीपावली त्यौहार के दौरान ग्रामीण परिवेश में देखने को मिलता है।पारम्परिक प्राचीन वाद्य यन्त्रो की सुरीली धुन के रूप में प्राचीन वाद्य यंत्रों को बचाये रखने में भी इन सारे त्यौहारो का अपना बड़ा योगदान है। वही आपसी भाई चारे की मिसाल कायम करते तमाम जाती धर्म के लोगो को इन झांकियों में बखुबी शामिल होते देखने को मिलती है।आदिवासी समुदाय के अलावा हिंदु समाज के अन्य जातियों के लोगो द्वारा इस झाँकी में बेहद सम्मान पुर्वक पुजा अर्चना कि जाती है।छत्तीसगढ़ में पारंपरिक त्योहारों के जरिये विभिन्न मौको में अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित होने का मौका भी मिलता है।लेकिन वर्तमान समय मे पारंपरिक त्योहारों के प्रति घटते रुझान से अब चिन्ता इस बात की है कि कही धीरे धीरे ये सारे इतिहासिक समृद्धि को लिए पर्व कही विलुप्ति की कगार पर ना पहुँच जाएं।हालांकि छतीसगढ़ आदिवासी बहुल राज्य है लेकिन प्राप्त तस्वीरों को देखने पर चिंता की एक लकीर अवश्य खीच जाती है ।ऐसे में शासकीय प्रयासों और योजनाओं के जरिये प्राचीन परम्पराओ को सहेजने हेतु कार्य किये जाने की दृढ़ आवश्यकता है।

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