
।।एक पिता के लिए बड़े गर्व की बात होती है, जब उनकी बेटी उन्हीं के पेशे में ऊंचे अाेहदे पर काम करे।।
महासमुंद(काकाखबरीलाल)।एक पिता के लिए बड़े गर्व की बात होती है, जब उनकी बेटी उन्हीं के पेशे में ऊंचे अाेहदे पर काम करे। दंतेवाड़ा में तैनात डीएसपी दिनेश्वरी नंद ऐसी ही एक बेटी का नाम है। जिस इलाके में दिनेश्वरी के पिता किस्मत लाल नंद ने टीआई की नौकरी की, उसी दंतेवाड़ा में उनकी बेटी अब अफसर बनकर कानून-व्यवस्था ही नहीं बल्कि नक्सल मोर्चे पर ऑपरेशन संभाल रही है। दिनेश्वरी के पहले भी दंतेवाड़ा में 3 महिला डीएसपी रह चुकी हैं, लेकिन नक्सल मोर्चे पर काम करने वाली दिनेश्वरी पहली अफसर हैं, वहीं एक संयोग उनके पिता से भी जुड़ा हुआ है।
खास यह भी रहा कि पिता के रिटायरमेंट से तीन साल पहले दिनेश्वरी पीएससी उत्तीर्ण कर सीधे डीएसपी बनीं, उधर कुछ समय बाद पिता भी प्रमोट होकर इसी पद पर रिटायर हुए। दंतेवाड़ा में कई साल तैनात रहे दिनेश्वरी के पिता का रायगढ़ ट्रांसफर हुआ, जनवरी 2018 में वहीं से वे रिटायर हुए। वहीं कमांडो की वर्दी में टीम के साथ निकलने वाली दिनेश्वरी अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा बनती जा रहीं हैं।
रिटायरमेंट के बाद राजनीतिक पारी शुरू करने वाले किस्मत लाल अभी महासमुंद जिले के सरायपाली से कांग्रेस विधायक हैं। वे कहते हैं कि बेटियां पिता की सबसे लाडली होती हैं, वही पिता का सिर भी गर्व से ऊंचा करती हैं। बेटियों में कुछ कर गुजरने का जुनून होता है। आज मेरी से बड़ा मान मेरे लिए कुछ और नहीं है। मैं हर मां-बाप से यही कहूंगा कि बेटियों को पढ़ने और आगे बढ़ने का मौका दें। एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव कहते हैं कि काम के प्रति दिनेश्वरी का जुनून अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा हैं। यही उत्साह देख दिनेश्वरी के नेतृत्व में नक्सल मोर्चे के लिए महिलाओं की टीम बनाई गई है।
डीएसपी की ट्रेनिंग के वक्त का 2 वर्ष पुरानी फोटो
पिता-बेटी ने एक साथ ली थी ट्रेनिंग
एक और खास बात यह है कि किस्मत लाल जब 2015-16 में प्रमोट होकर डीएसपी बने, उसी समय दिनेश्वरी भी पीएससी की परीक्षा पास कर डीएसपी बनीं। पिता-बेटी ने साथ में ही ट्रेनिंग ली थी। किस्मत लाल कहते हैं कि मेरे लिए सबसे अनमोल दिन थे जब दिनेश्वरी और मैंने साथ ट्रेनिंग ली थी। बेटी ने गर्व से मेरा सीना चौड़ा कर दिया। उसने मेरे सपने को अपना सपना बनाया। मैं जिस पद से रिटायर हुआ, उसी पद से नौकरी की शुरुआत बेटी ने की, ऐसा सौभाग्य बहुत ही कम लोगों को मिलता है। इधर दिनेश्वरी कहती हैं कि पिता को पुलिस की नौकरी में देख मैंने भी पुलिस अफसर बनने का सपना पाल लिया था। काफी अच्छा लगता है आज उसी इलाके में सेवा दे रही हूं जहां वो ड्यूटी करते थे।
अभी डीआरजी महिला टीम की हैं प्रभारी
दिनेश्वरी अभी महिला डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड्स) की टीम दंतेश्वरी फाइटर्स की प्रभारी बनाई गईं हैं। यह टीम लॉ एंड ऑर्डर के साथ नक्सल मोर्चे पर काम करती है। इसके पहले महिला डीएसपी को नक्सल मोर्चे का जिम्मा नहीं दिया जाता था। इस 15 अगस्त पर दिनेश्वरी को इस लीडरशिप के लिए पुरस्कृत भी किया गया है।



























