मैं गीत लिखता जाऊंगा – सौदागर साहू की कलम से

अरमान दिल में
खुशी दिल में
नव वर्ष नव भोर में
जिस क्षण को चाहूंगा
इस देश में इस प्रदेश में
वो हर बात लिखता जाऊंगा
मैं गीत लिखता जाऊंगा।
हर जनता की आवाज़ को
संगठन और समाज को
बदलते सुबह और शाम का
पंक्तियां कठोर कड़वे हो भले
चाहे पंक्तियों से दिलजले
वो हर बात लिखता जाऊंगा
मैं गीत लिखता जाऊंगा।
महिलाओं पर अत्याचार का
गरीबों पर छलता निष्पक्षता का
हद पार करती गंदी राजनीति का
समाज की नीति और अनीति का
हर चौराहे पर
प्रश्न पूछता जाऊंगा
वो हर बात लिखता जाऊंगा
मैं गीत लिखता जाऊंगा।
ओझल हो रही संस्कृति है
अफसर हो रहा भ्रष्ट है
विकास कार्यों का बंदरबांट चल रहा है
न्याय बस
गुहार पे गुहार सुन रहा है
आम आदमी बेबस देख रहा है।
स्वाधीनता की मधुर गान को
बुरे और अच्छे मतदान को
दिवाली क्रिसमस और रमजान को
हमेशा बताता चला जाऊंगा
वो हर बात लिखता जाऊंगा
मैं गीत लिखता जाऊंगा।
रास्ते में हैं मंजिल एक है मेरी
इस कलम से श्वेत पृष्ठ पर
हिसाब मांगता जाऊंगा
मैं वो हर बात लिखता जाऊंगा
मैं गीत लिखता जाऊंगा।
– सौदागर साहू
मोहदा, सरायपाली



























