आयुर्वेदिक चिकित्सक भी लिख सकेंगे एलोपैथिक दवाई

काकाखबरीलाल,सरायपाली । छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सन् 2013 में नर्सिंग होम एक्ट का गठन किया गया था. जिसमें आयुर्वेद चिकित्सकों को पूर्व में कर रहे एलोपैथिक चिकित्सा के अधिकार को समाप्त कर दिया गया था. आदेश उपरांत छत्तीसगढ़ के समस्त आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा शासन से पुन: एलोपैथिक चिकित्सा का अधिकार देने की मांग की जा रही थी. शासन द्वारा 4 साल बाद 2017 में पुन: उनके एलोपैथिक दवाई लिखने के अधिकार को मान्य कर दिया गया था. किन्तु आई एम ए द्वारा शासन के आदेश का विरोध करते हुए उक्त आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसमें लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद विगत 29 नवम्बर को हाई कोर्ट ने आयुर्वेद चिकित्सकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें एलोपैथिक दवाई लिखने का अधिकार पुन: मान्य किया है. कोर्ट के इस आदेश से समस्त आयुर्वेद चिकित्सकों में हर्ष व्याप्त है. आयुर्वेद चिकित्सक आयुर्वेद महासंघ महासमुंद के जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह प्रेम, उपाध्यक्ष देवेंद्र देवता, दीपक हलवाई, आशीष दास, सचिव शिवाजी साहू, देवेंद्र प्रधान, लंबोदर भोई, अजय नायक, जयराम पटेल, शैलेंद्र प्रधान, प्रवीण नायक, देवकांत प्रधान, विजय चंद्राकर, नीलाम्बर पटेल, जय पटेल आदि ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से उक्त जानकारी देते हुए इसे आयुर्वेद चिकित्सको के पक्ष में अपनी बड़ी जीत बताई है.




























