हेपेटाइटिस है एक खतरनाक रोग,अनजाने में हो सकती है महामारी

अंतरराष्ट्रीय हेपेटाइटिस दिवस पर विशेष
शुकदेव वैष्णव।स्वास्थ्य विशेष- हेपाटाइटिस बी वायरस (HBV) के काऱण होने वाली एक संक्रामक बीमारी है जो लीवर को संक्रमित करती है, जिसके कारण लीवर में सूजन और जलन पैदा होती है। हेपेटाइटिस के कारण एशिया और अफ्रिका में महामारी पैदा हो चुकी है और चीन में यह स्थानिक मारक है। विश्व की जनसंख्या के एक तिहाई लोग (दो अरब से अधिक) हेपेटाइटिस बी वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 35 करोड़ इस वायरस के दीर्घकालिक वाहक के रूप शामिल हैं। हेपेटाइटिस बी वायरस का संचरण संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में जाने से होता है।
स्वास्थ्य सम्बन्धी समाजसेवा में समर्पित डॉ सतीश दीवान ने बताया कि इस संक्रमण की एक विचित्र बात ये है कि ऐसा हो सकता है कि आपको हेपेटाइटिस बी हो और आपको मालूम भी नहीं हो। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसा संभव है कि इसके लक्षण दिखाई ना दें। और यदि नज़र आते हैं तो वह फ्लू के लक्षण जैसे होते हैं। लेकिन इस स्थिति में भी आप इससे अपने आस पास के लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।
विश्व के 10–15% हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त लोग भारत में मौजूद हैं। अनुमान लगाया गया है कि भारत में 4 करोड़ ऐसे मरीज़ हैं।
हेपेटाइटिस के प्रमुख लक्षण हैं- लीवर में सूजन और जलन, उल्टी, जो अन्ततः पीलिया और कभी-कभी मौत का कारण हो सकता है। दीर्घकालिक हेपेटाइटिस बी के कारण अन्तत: लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर हो जाता है, जो ऐसी घातक बीमारी है जिस पर कीमोथेरपी का भी बहुत कम असर होता है। संक्रमण पूर्व टीकाकरण द्वारा निवारणीय है। यह एक ऐसी बिमारी है जो समान्य खराब स्वास्थ्य, भूख के नाश, मिचली, उल्टी, शरीर में दर्द, हल्का बुखार, गहरा पेशाब और असके बाद पीलिया के विकास की प्रगति से शुरू होती है। यह ध्यान दिया गया है कि त्वचा में खुजली सभी हेपाटाइटिस वायरस के प्रकारों के एक संभावित लक्षण का संकेत करती रही है। सबसे अधिक प्रभावित लोगों में यह बीमारी कुछ एक हफ्तों के लिए रहती है और फिर धीरे धीरे सुधार हो जाता है। संक्रमण पूरी तरह से अनजाने ही बढ़ सकते हैं। हेपेटाइटिस बी वायरस युक्त दीर्घकालिक संक्रमण या तो स्पर्शोन्मुख या कई वर्षों की अवधि से अधिक के लिए सिरोसिस को दिशा देता हुआ लीवर के एक दीर्घकालिक सूजन (क्रोनिक हेपाटाइटिस) से संबन्धित हो सकता है। इस प्रकार के संक्रमण नाटकीय रूप से हेपैटोसेलुलर कर्सिनोमा (लिवर कैंसर) की घटना को बढ़ा देते हैं। दीर्घकालिक वाहकों को शराब छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है क्योंकि यह उनके सिरोसिस और लीवर कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है।
डॉ सतीश दीवान ने समाजसेवा करते हुए अनेक निशुल्क चिकित्सा आयोजनों के दौरान मरीजों का अध्ययन किया और पाया कि हेपेटाइटिस बी हो सकता है यदि –
संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध बनाने,
एक संक्रमित व्यक्ति के साथ सुई का साझा इस्तमाल करने,
अस्वच्छ उपकरणों से गुदाई कराने,
संक्रमित व्यक्ति के साथ रेज़र या टूथब्रश जैसी निजी चीज़ों का साझा इस्तेमाल करने,
अथवा संक्रमित मां के द्वारा प्रजनन के दौरान बच्चे को हैपेटाइटिस बी वायरस पास हो सकता है।
इससे बचने के लिए सुझाव है कि सभी गर्भवती महिलाओं को हेपेटाइटिस बी का परीक्षण कराना चाहिए । यदि आप वायरस से ग्रस्त है, तो आपके शिशु को इससे बचाव के लिए टीके लगाए जा सकते हैं।
डॉ दीवान ने लोगो की भ्रांतियां दूर करते हुए कहा कि हेपेटाइटिस बी मरीज से गले लगाने, चुंबन, छींकने, खांसी, या भोजन या पेय साझा करना से यह संक्रमित नहीं होते हैं।
डॉ दीवान ने हेपेटाइटिस बी के प्रारंभिक लक्षण बताते हुए आगे बताया-
अत्याधिक थकान महसूस होना।
वायरस के कारण हल्का बुखार आना।
सर में दर्द होना।
खाना खाने की इच्छा न होना।
उल्टी आना।
पेट में दर्द होना भी इसका एक मुख्य लक्षण है।
मल का रंग गहरा नज़र आ सकता है।
मूत्र का रंग भी गहरा प्रतीत होता है।
आँखों और त्वचा का पीला होना (पीलिया)। पीलिया आमतौर पर केवल तब ही विकसित होता है जब अन्य लक्षण ख़तम होने लगते हैं।
क्रोनिक हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त अधिकांश लोगों में इसके कोई लक्षण नज़र नहीं आते हैं।
डॉ दीवान ने इस गम्भीर और खतरनाक हेपेटाइटिस वायरस से बचने के लिए सलाह देते हुए कहा कि बच्चों से लेकर सभी उम्र के लोगो को टीकाकरण कराते हुए पूर्व से ही अपने लिवर की सुरक्षा करनी चाहिए।
हेपेटाइटिस बी वैक्सीन संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि आप इसके टीकाकरण की श्रृंखला में लगने वाले 3-4 इंजेक्शन प्राप्त करते हैं, तो यह वैक्सीन हेपेटाइटिस बी के खिलाफ 95% प्रभावी होती है।
वैक्सीन कम से कम 20 सालों तक संक्रमण के प्रति आपको सुरक्षा प्रदान करती है। हेपेटाइटिस ए और बी के लिए एक संयोजन वैक्सीन भी उपलब्ध है।
कुछ लोगों के लिए टीकाकरण कराने की विशेष सलाह दी जाती है। जैसे – स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े लोग, एक से अधिक लोगों के साथ यौन सम्बन्ध बनाने वाले लोग और कुछ बीमारियों से ग्रस्त लोग।
डॉ सतीश दीवान
प्रदेश अध्यक्ष
विप्र स्वास्थ्य सेवा संगठन

























