बागबाहरा

बागबाहरा: बैठक व्यवस्था में अनोखी पहल

*बैठक व्यवस्था में हुआ नवाचार अब कोई बच्चा पीछे नहीं बैठता*

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड की प्राथमिक शाला खट्टाडीह ने शिक्षा में एक अनूठी पहल की है। यहां अब क्लासरूम में कोई भी विद्यार्थी पीछे की सीट पर नहीं बैठता। सहायक शिक्षक अमित कुमार उइके ने बच्चों को ‘यू’ आकार में बैठाने की व्यवस्था की है।

इस प्रकार के बदलाव और नवाचार का उद्देश्य सभी बच्चो तक सीधा संवाद और प्रत्येक विद्यार्थियों पर समान रूप से ध्यान देना है। पहले बच्चे आगे पीछे बैठते थे तो पीछे बैठे बच्चे क्या कर रहे हैं शिक्षक देख नहीं पाते थे।अब यू आकर में बैठक व्यवस्था होने पर सभी बच्चे पुस्तक और कॉपी में क्या कर रहे हैं ये आसानी से समझ आ जाता है। पहले शिक्षक ब्लैक बोर्ड तक सीमित रह जाते थे अब सभी बच्चो तक पहुंच कर पढ़ाना आसान हो चुका है।इस बदलाव से कक्षा पहली से पांचवीं तक के सभी बच्चों पर शिक्षक की समान नजर बनी रहती है। दीवारों के सहारे इस तरह से लगाए गए टेबल-बेंच सुनिश्चित करते हैं कि हर बच्चा फ्रंट रो में रहे और शिक्षक को स्पष्ट देख सके। इस व्यवस्था से बच्चों में आत्मविश्वास और सक्रियता बढ़ी है। शिक्षा सत्र की शुरुआत में शिक्षकों ने खुद इस बदलाव को बारीकी से परखा और इसके सकारात्मक परिणामों को अभिभावकों के साथ साझा किया।

*बढ़ता है शिक्षक-छात्र का जुड़ाव*
शिक्षक अमित कुमार उइके ने बताया कि इससे शिक्षक-छात्र का जुड़ाव बढ़ता है और वह हर बच्चे पर पूरा ध्यान दे पाते हैं। परिणाम स्वरूप, बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ी है और सभी को बराबर अवसर मिल रहा है। यहां अपनाई गई ‘यू’ आकार की बैठक व्यवस्था ने पारंपरिक कक्षाओं में पीछे बैठने वाले छात्रों को होने वाली बोर्ड देखने या समझने की दिक्कत को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

इस नई व्यवस्था में सभी बच्चे ध्यान से पढ़ते और बेझिझक सवाल पूछते नजर आ रहे हैं, जिससे ‘बैकबेंचर’ की अवधारणा समाप्त हो गई है। यह बैठक व्यवस्था सभी छात्रों को कक्षा में समान रूप से शामिल होने और सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर दे रही है। यह एक बेहद सकारात्मक बदलाव है, जो छात्रों के बीच समान अवसर और भागीदारी को बढ़ावा देता है। अभिभावकों ने भी इस पहल की प्रशंसा की है।

*दीवारों को विषय आधारित बनाया गया है*
NEP 2020 की परिकल्पना को देखते हुए विषय आधारित दीवारों को बनाया गया है जिससे बच्चो में विषय की रोचकता बढ़ गई है।प्राथमिक शाला में विद्यार्थियों को एक निजी स्कूल की तर्ज पर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। यहां की दीवारों से बच्चे ज्ञानवर्धन जानकारियां अर्जित कर रहे हैं। स्कूल की दीवारों पर पढाई से संबंधित चित्र, चार्ट और स्लोगन लिखाए गए हैं। दीवारों में ए से जेड तक अक्षर, गिनती, रंगों के नाम, जानवरों के नाम, फलों के नाम, शरीर के अंगों के नाम, पर्यावरण संरक्षण से संबंधित संदेश लिखे हुए

*अब कोई बच्च पीछे नहीं बैठता , जिससे बच्चों में बढ़ा आत्मविश्वास*
शिक्षक अमित कुमार उइके और प्रधान पाठिका श्रीमती श्रद्धा महानंद ने बताया हैं कि यू-आकार में बैठने से बच्चों पर पूरी नजर रहती है। सामने की बेंच में बैठने से बच्चों में आत्मविश्वास भी बढ़ा है। क्लास रूम में पहली रो- की बेंच में बैठने को लेकर बच्चे अक्सर झगड़ा करते थे। अभिभावकों की भी शिकायतें आती थी, तभी मन में नवाचार करने का ख्याल आया और बच्चों को यू-आकार में बैठाकर पढ़ाई करना शुरू की।

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काका खबरीलाल

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