साहित्य - कविताएं

कोरोना वायरस को दुर भगाने के लिए छत्तीसगढी़ कविता

(रायपुर काकाखबरीलाल).

हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो।
एको जीव गंवावय झन, उदिम अईसे करबो।।

जोडी संग वादा निभाबोन,
जिनगी ल बचाबो।
सरकार के बात मानके,
घर के भीतरी रहिबो।।1।।
हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो।

चाउर दार के नई हे कमी,
ए बात ल बगराबो।
फोकट म सरकार देवत हवय
रांध-रांध के खाबो।।2।।
हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो।

जीमी कांदा-सेमी खोईला
जम्मो सुकसी ल सिरवाबो।
पाछू साल के अथान आम के
चांट-चांट के खाबो।।3।।
हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो।

मही म चाउर पिसान घोर,
कढ़ी सुग्घर बनाबो।
सुखा मिरचा अउ लहसुन के
चटनी ल खाबो।।4।।
हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो।

पसई नून खाके
जिनगी ल बचाबो।
तभेच माई पिला मिलके
हरेली ल मनाबो।।5।।
हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो।

फोकट घर ले निकलन नहीं,
तिरि पासा खेलबो।
दारू-कुकरी के पइसा बचाके
नोनी बर फराक लेबो।।6।।
हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो।

घर के भीतरी उधमकूद
लईका संग करबो।
हमरो बंस ह अमर राहय,
काम अईसे करबो।।7।।
हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो।

घर के मेयार म साडी बांध
बाबू ल झुलना झूलाबो।
एक साहर के राजा कहिके
सुग्घर कहानी सुनाबो।।8।।
हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो।

अंगना म गहिरा कोडके
करा बाटी खेलबो।
बारी म रेंहचूल बांध के
एहू ल झूलाबो।।9।।
हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो।

रचनाकार – एचपी जोशी, नवा रायपुर, छत्तीसगढ़

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