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अंधेर नगरी चौपट अधिकारी: लोक सुराज के आवेदन को बनाया मजाक?बेजा कब्जा की शिकायत पर कार्य स्वीकृति की दे रहे है जानकारी, जिला निमार्ण के आवेदन को तहसीलदार सारंगढ़ को भेजा गया? रेल मार्ग की मांग को तहसीलदार बरमकेला को भेज दिया गया? बेसुध होकर कार्य कर रहे है नगर पालिका के अधिकारी?

सारंगढ़ से /ओमकार केशरवानी /
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वपूर्ण लोक सुराज अभियान की धज्जिया उड़ाने की प्रतिस्पर्धा मे राज्य में पहले नंबर पर सारंगढ़ नगर पालिका का स्थान होगा। मुख्य सचिव ने साफ निर्देश दिया है कि लोक सुराज के आवेदनो को गंभीरता के साथ निराकरण किया जाये। किन्तु अंधेर नगरी चौपट अधिकारी वाले सारंगढ़ नगर पालिका में लोक सुराज के आवेदनो को कितना गंभीरता के साथ निराकरण किया जा रहा है इस ज्ञात हो रहा है आवेदनो के निराकरण की कार्यवाही को देखकर। अवैध कब्जा को हटाने के लिये दिया गया आवेदन को लोक सुराज अभियान मेे निराकृत कर दिया गया और जवाब में लिखा गया है कि स्थल निरीक्षण करने के उपरांत शासन से निमार्ण की अनुमति हेतु प्राक्कलन तैयार कर भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही निमार्ण कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा। यानि किसी निमार्ण की मांग संबंधी निराकृत शब्दो को कापी पेस्ट करके जिस आवेदन के निराकरण में अंकित कर रहे है उसमें इतना भी ध्यान नही रख रहे है कि आखिर आवेदन की विषय वस्तु क्या है? स्वाभाविक है कि कचरे के डिब्बे में डालना जैसा निराकरण सारंगढ़ नगर पालिका नागरिको के आवेदनो पर कर रही है।
बड़ी उम्मीद और आशा लगाकर छत्तीसगढ़ की लाखो जनता के द्वारा लोक सुराज अभियान में शिकायत/मांग आदि प्रस्तुत कर टकटकी लगाकर निराकरण की उम्मीद लगाई रहती है किन्तु नगर पालिका सारंगढ़ में पदस्थ मुख्य नगर पालिका अधिकारी खेलकुमार पटेल और उपयंत्री तारकेश्वर नायक के द्वारा जिस बेर्ददी से लोक सुराज के आवेदनो को निराकरण किया गया उससे सब्र का बांध टूटते देर नही है। लापरवाही और मनमानी का आलम यह है कि आवेदन को बिना पढ़े ही निराकृत का ठप्पा लगा दिया जा रहा है। यह भी नही देखा जा रहा है कि आखिर आवेदन किस लिये है और क्या मांग किया गया है? या क्या शिकायत किया गया है? सिर्फ निराकरण करने के लिये कुछ भी लिखकर निराकृत कर दिया जा रहा है। मोटी तनख्वाह पाने वाले इन मोटी चमड़ी वाले अधिकारियो की मनमानी का आलम यह है कि एक दूसरे पर दोषारोपण कर मामले को दबाने के लिये रहस्यमय चुप्पी साधे बैठे हुए है। अमितेश केशरवानी निवासी सारंगढ़ ने सारंगढ़ अस्पताल के सामने सरकारी भूमि खसरा नंबर 4/1 पर सुप्रिया द्धिवेदी के द्वारा किया गया अवैध कब्जा और दो मंजिला भवन निमार्ण की शिकायत लोक सुराज अभियान मे किया जिस पर प्रकरण क्रमांक 318042040900015 में 4 मार्च 2018 को प्रकरण को निराकृत करते हुए दर्शाया गया कि आवेदक के शिकायत पर स्थल निरीक्षण किया गया तथा कार्य का प्राक्कलन तैयार कर तकनिकी स्वीकृति उपरांत शासन को प्रस्ताव भेजा जायेगा। अब कोई सीसी रोड़ या आंगनबाड़ी भवन का निमार्ण के लिये आया मांग पर नगर पालिका अधिकारी निराकरण ऊपर लिखे शब्दो से करते है किन्तु बेजा कब्जा हटाने के लिये शासन को तकनिकी स्वीकृति कराकर प्रस्ताव भेजना? यह तो अनपढ़ आदमी को भी समझ में आ जायेगा कि बेसुध होकर आवेदनो का निराकरण किया गया है। बेजा कब्जा हटाना छोडक़र नगर पालिका के द्वारा सिर्फ कागजी कार्यवाही करना तथा गरीबो को बेजा कब्जा के नाम पर तंग करना ही एक मात्र खेल रह गया है। नही तो आज तक सुप्रिया द्धिवेदी के अवैध कब्जा पर कार्यवाही क्यो नही किया जा रहा है? वही लोक सुराज के आवेदन पर कार्यवाही के स्थान पर शासन से स्वीकृति जैसे शब्द लिख कर गोल गोल शब्दो से प्रकरण को निराकृत लिखा जा रहा है? आखिर कैसे नासमझ अधिकारियो को यहा का दायित्व दे दिया गया? यह समझ से परे है? नो तो सीएमओ ने आवेदन को पढ़ा? और ना ही उपयंत्री ने आवेदन को पढ़ा? यानि आवेदन का निराकरण कम्प्यूटर आपरेटर के द्वारा किया जा रहा है? जिस पर सारा दोष सीएमओ और उपयंत्री थोप रहे है? हे भगवान लोक सुराज के आवेदनो पर ना सिर्फ लापरवाही किया जा रहा है बल्कि सिर्फ और सिर्फ मजाक किया जा रहा है सारंगढ़ के पढ़े लिखे अधिकारियो के द्वारा।
सारंगढ़ जिला का आवेदन तहसीलदार सारंगढ़ को तो रेल का मैटर तहसीलदार बरमकेला को?
सीएमओ खेलकुमार पटेेल के द्वारा सिर्फ एक आवेदन में मजाक किया गया हो ऐसी बात नही है बल्कि सारंगढ़ जिला निमार्ण जैसे संवेदनसील मुद्दे की मांग को लेकर आया आवेदन को तहसीलदार सारंगढ़ को उचित कार्यवाही के लिये प्रेषित कर दिया गया जबकि होना यह था कि उक्त आवेदन को मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को प्रेषित करना था किन्तु सीएमओ ने इसे तहसीलदार सारंगढ़ को प्रेषित कर दिया वही सारंगढ़ में रेल सुविधा वाली मुख्य मांग रायपुर-झारसुगड़ा रेल मार्ग को यथावत रखने की मांग को सीएमओ ने प्रदेश शासन को फार्रवड़ करने के स्थान पर तहसीलदार बरमकेला को प्रेषित कर दिया। शायद बेसुध होकर आवेदनो का निराकरण सीएमओ और उपयंत्री करने मे तुले हुए है।

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