सरायपाली : तोषगांव एवं मुड़पहार में हुआ हास्य कवि सम्मेलन

भक्ति भावना जन सहयोग से दुर्गा मंडप में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी सार्वजनिक दुर्गा उत्सव कार्यक्रम आयोजन किया गया। जहां प्रतिदिन रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों दुर्गाष्टमी तिथि पर क्षेत्र के गांधीवादी

लोटपोट किया, खीरसागर चौहान ने
जहां मुख्य अतिथि विद्याभूषण तोषगांव, महेन्द्र विशाल एवं राजेन्द्र सिंह सिदार शिक्षक द्वय रहे। इस दौरान छत्तीसगढ़ एवं पश्चिम ओडिशा से पधारे कवि ललित बारिक गोविंदपुर बरगढ़, संतोष भोई भटली बरगढ़, नवीन बाघ रायशोभा कविता पाठ का कवि सम्मेलन पर हास्य व्यंग काव्य पाठ प्रस्तुत
कार्यक्रम का आयोजन किया गया, ग्राम पंचायत तोषगांव के स्कूलपारा सतपथी, विशिष्ट अतिथि पदमिनी वार्ड एवं समस्त ग्रामवासियों के विशाल सरपंच ग्राम पंचायत किए। कविता पाठ मेरा भारत महान ने छत्तीसगढ़ महतारी एवं मोबाइल और राष्ट्र जातीय पताका तिरंगा झंडा वाले गीत पर बेहतरीन प्रस्तुति दी, के साथ राष्ट्रगान जन गण मन के विनोद कुमार चौहान जोगी ने धुन बजने पर दर्शक दीर्घा ने
का आयोजन किया गया। इस दौरान रूनापाली बरगढ, कैलाशचंद्र दास सावधान की मुद्रा में राष्ट्र का सम्मान प्रस्तुत किया, शंकर सिंह सिदार के सुधी स्रोताओं ने देर रात दो बजे किया। कवि सम्मेलन के माध्यम से समाज सेवी साहित्यकार शिक्षाविद् बरगढ़ एवं रसानंद भोई डूमरपाली देशभक्ति और देवी मां दुर्गा भक्ति जन जागरुकता फैलाने का काम जिसमें विशेष रूप से समिति सचिव विद्याभूषण सतपथी के नेतृत्व में रायगढ़ छत्तीसगढ़ के कवियों ने का एक समन्वित प्रयास के लिए दुर्गा किया, परशुराम चौहान ने बेहतरीन गुलाब किशोर, अध्यक्ष रमेश भोई, ओडिसी कोसली सम्बलपुरी भाषा अपनी मातृभूमि देशभक्ति वर्तमान पूजा समिति को ग्रामवासियों ने गजल सुनाकर स्रोताओं को उपाध्यक्ष महेन्द्र बहादुर एवं में आधारित साहित्यिक हास्य व्यंग राजनीति समसामयिक घटनाचक्रों आभार प्रकट किए। कार्यक्रम की संगीतमय माहौल दिया, जान सिदार कोषाध्यक्ष नारायण भोई की
दुर्गा दरबार में संस्कार साहित्य मंच का शानदार कवि सम्मेलन
वहीं ग्राम मुड़पहार में विगत दिनों 2 अक्टूबर को नवरात्रि के सप्तमी पर बाम मुड़पहार के गणेश दुर्गा समिति की मेजबानी में संस्कार साहित्य मंच के साहित्यकारों ने शानदार कवि सम्मेलन किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत मंच के संचालक एवं सह संचालक शंकर सिंह सिदार गोले, गणपत देवदास के संयुक्त संचालन में देव वंदना से हुई। पश्चात मंच के प्रसिद्ध गजलकार परशुराम चौहान ने मधुरिम सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। पश्चात सभी साहित्यकारों का पुष्प हार एवं पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में प्रथम काव्याहूति डिजेन्द्र कुरें कोहिनूर के पहले के समय और वर्तमान परिदृश्य में अंतर स्पष्ट करती छत्तीसगढ़ी रचना से हुई।
श्रृंगार पर घनाक्षरी प्रस्तुत की, और फिर अंतिम कड़ी में गणपत देवदास ने बेटियों पर शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को आनंद के सागर में गोते लगाने के लिए मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में ग्राम मुड्पहार तक कार्यक्रम का लुफ्त उठाया।
रूक्मणी प्रमोद भोई ने श्रृंगार सृजन
छत्तीसगढ़ महतारी को काव्य पुष्प में नोक-झोंक के साथ चुटकी ली अर्पित किए, मानक दास मानिकपुरी मगन ने देश के विभिन्न मुद्दों पर व्यंग सृजन कर दर्शकों को हंसाया, सुकमोती चैहान रुचि ने श्रृंगार के गीत से दर्शकों के हृदय में प्रेम भाव भोले ने मद्यपान पर व्यंग रचना कर अगली कड़ी में धनीराम नंद मस्ताना ने अपने मिमिक्री के जादू से सभी को उपस्थिति रही ।



























