सरायपाली : भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है माता जामबहलिएन

पूरा शहर इन दिनों माता की भक्ति में डूबा हुआ है। नवरात्र के प्रारंभ होते हुए माता दुर्गा के मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटने लगती है।

शहर के दुर्गा पंडालों में मॉ दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं को देखने के लिए शाम होते ही भक्तों की भीड़ जुट रही है। वहीं भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु मंदिर पहुंचकर विभिन्न प्रकार से माता की आराधना भी कर रहे हैं। शहर के अंतिम छोर पर ग्राम बैतारी के पास स्थित जामबहलिएन मंदिर में भी हजारों भक्त अपनी मनोकामना के लिए पहुंचते हैं।

जामबहलिएन मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। पहले जब वहां मंदिर नहीं बना था, तब वहां केवल जाम का पेड़ था। कहा जाता है कि इस पेड़ पर माता झूला झूलती थी। तब से पुजारियों द्वारा इसका नाम जामबहलिएन रखा गया है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे दिल से यहां आकर मां की अराधना करते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर में माता जामबहलिएन विराजित हैं। यहां पर कई पुजारी पूजा कर चुके है। वर्तमान पुजारी गौरचरण भोई ने बताया कि पहले उनके पिताजी यहां के पुजारी थे, उनके जाने के बाद से वे यहां पूजा पाठ करते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें माता का सपना आया था कि वे मंदिर में आकर पूजा पाठ करें, तब से वे ही मंदिर मंे पूजा पाठ कर रहे है। नवरात्र हो या सामान्य दिन यहां प्रतिदिन 24 घण्टे एक ज्योत जलता ही रहता है। पुजारी के द्वारा प्रतिदिन सुबह शाम माता का आराधना की जाती है।मनोकामना पूर्ण करने कर नापते चलते हैं भक्त लोग अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए यहां प्रतिदिन पहुंचते हैं। खासकर शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र पर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। लोग अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए यहां नारियल, चुनरी, चावल, सिक्का पेड़ में बांधते हैं। बताया जाता है कि किसी के घर में सोने, चांदी या किसी भी वस्तु की चोरी होती है तो वे यहां मनोकामना कर गेरवा बांधकर घी के दिये के साथ नारियल चढाते हैं, जिससे उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। कई भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए कर नापते चलते हैं, जिसमें हजारों कदम लेटकर चला जाता है। इस प्रकार करनपा चलना बहुत कठिन होता है, परंतु भक्तों में इतनी आस्था होती है कि वे हजारों कदम लेटर करनपा चलते है। कहा जाता है कि यहां किसी भी भक्त की मनोकामना खाली नहीं जाती। वहीं पुजारी ने बताया कि यहां मनोकामना पूर्ण होने पर अमावस्या के दिन शनिवार एवं मंगलवार को बली देने की भी परम्परा है। नवरात्र के अवसर पर शहर सहित ग्रामीण अंचल के भक्तों द्वारा यहां मनोकामना ज्योति कलश भी जलाया गया है। जिसमें तेल के 132 दीये जल रहे हैं। पुजारी ने बताया कि यहां मंदिर के विस्तार की आवश्यकता है, लेकिन जमीन नहीं होने की वजह से इस मंदिर का विस्तार नहीं हो पा रहा है।

























