रायपुरसाहित्य - कविताएं
मनखे-मनखे एक समान
मनखे-मनखे एक समान
कोई नीच न है कोई महान

*मानवता:*
रायपुर (काकाखबरीलाल).जो स्वयं को श्रेष्ठ घोषित कर अन्य को किसी भी आधार पर छोटा/नीच मानता है उसका यह अनैतिक कृत्य उसे अमानवीय बना देता है जबकि जो मनुष्य किसी अन्य को महान/श्रेष्ठ मानकर उसे पूजता है वह स्वयं ही श्रेष्ठ बन जाता है। परन्तु इसका तात्पर्य यह कदापि नही कि वह स्वयं को नीच/छोटा समझकर सामने वाले को पूजाता हो, यदि वह ऐसा करता है तो उसका यह विचार उसे पतन की ओर ले जाता है।
*मनखे-मनखे एक समान*
*कोई नीच न है कोई महान*
हुलेश्वर जोशी 9406003006
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