छत्तीसगढ़

महांसमुद: सडक़ दुर्घटना से विस्तर में है तेजस्वी लेकिन हौसले से दिला रही बी ए फाइनल की परीक्षा

महासमुंद की एक होनहार कॉलेज छात्रा की हालत सडक़ दुर्घटना में इस तरह की हो गई है कि वह न तो बिस्तर से उठ सकती है, न हाथ चलता है न पांव। फिर भी उसने हार नहीं मानी है और अभी बी ए फाइनल की परीक्षा दिला रही है। दोनों हाथों में पेन पकडऩे की ताकत नहीं है, पांव और कमर में चलने-फिरने तक की ताकत नहीं, लेकिन वह जिंदगी जीत लेने की ताकत रखती है। उसे उम्मीद है कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। घर की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय है कि मां किसी तरह झाड़ू पोछा करके परिवार का लालन पालन कर रही है। पिता की मानसिक हालत ठीक नहीं है। एक छोटा भाई है जो मिडिल स्कूल में पढ़ता है।

यह हकीकत महासमुंद जिला मुख्यालय से जुड़े मचेवा गांव की है। कालेज के पीछे एक मिट्टी का घर है, जहां 22 साल की तेजस्वी बिस्तर पर पड़ी हुई है। मां ने उसे नहला धुला कर खाना खिलाया और दूसरे के घर में झाड़ू पोंछा करने गई है। तेजस्वी ने छत्तीसढ़ को बताया-मैं दो साल पहले महासमुंद स्कूल से 12वीं पास कर रायपुर स्थित दानी कॉलेज में एडमिशन ली थी। रायपुर में ही रहकर पढ़ाई कर रही थी। सब कुछ अच्छा चल रहा था। इसी बीच त्यौहार मनाने मचेवा आई। दूसरे दिन अपने परिजन के साथ बाइक में बैठकर रायपुर कॉलेज जा रही थी। रायपुर पहुंची तभी किसी ने हमारे बाइक को टक्कर मार दी। मैं पीछे बैठी थी। पीठ के बल गिर पड़ी।

मुझे अस्पताल ले जाया गया। पता चला कि मेरी रीढ़ की हड्डी टूूट गई है। थोड़े दिन तक सरकारी अस्पताल में इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई, यह कहकर कि किसी बड़े अस्पताल में इलाज करा लेना। घर में मैं छह महीने तक दर्द से तड़पती रही। इसके बाद मेरा इलाज हुआ। इसके बाद भी मैं इस हालत में हूं। मेरा पैर कभी लंबा नहीं होता। मां किसी तरह दबा दबाकर लंबा करती भी है तो तुरंत वापस खिंच जाता है। कोई बिठाए तो भी मैं बैठ नहीं पाती। मेरा दाहिना हाथ काम नहीं करता। केवल बाएं हाथ से पानी वगैरह पी लेती हूं। मुझे कुछ लोगों ने फाइनल की किताबें दी है। बिस्तर में लेटे-लेटे उसे पढ़ती हूं। परीक्षा दिला रही हूं। मेरा शरीर साथ नहीं देता, लेकिन मुझे सब कुछ याद है। बहुत से लोग हुए हैं, जिनका शरीर काम नहीं करता था, लेकिन उन्होंने नई-नई चीजें बनाई और नाम कमा गए। मैं हालात से हारती नहीं हूं, कोशिश में हूं की तकदीर से लडक़र जीत सकूं।

इस साल तेजस्वी बीएफाइनल की परीक्षा दिलाएगी। पिछले दो सालों तक उसने कोरोना काल में आन लाइन परीक्षा दी थी। तब उसकी उत्तर पुस्तिका में किसी और ने लिखा था। इसके लिए उसने कालेज से परमिशन ली थी। तेजस्वी प्रश्नों के उत्तर बोलती रही और लिखने वाले ने उत्तर पुस्तिका में उत्तर लिखा। इस बार भी तेजस्वी को उत्तर पुस्तिका में लिखने के लिए से राइटर रखने का परमिशन मिला है। वैसे इस बार भी आन लाइन परीक्षा हैै और तेजस्वी की उत्तर पुस्तिका कोई न कोई कॉलेज तक पहुंचाएगा। तेजस्वी को उम्मीद है कि वह बीए फाइनल कप लेगी। इसके बाद उसने पीएससी की तैयारी करने की ठानी है।

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छत्तरसिंग पटेल

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