छत्तीसगढ़

राजिम मेले का मंच नासिक और वेस्ट बंगाल के फूलों से सजा

स्टेज डेकोरेशन में फूलों का बड़ा महत्तव है। खासतौर पर जब स्टेज किसी बड़ी सेरेमनी के लिए बनाया जाए। आज महाशिवरात्रि है और इसके साथ ही राजिम में चल रहे माघी पुन्नी मेले का समापन भी। मुख्य सांस्कृतिक मंच में लोकगीत व नृत्य की झंकार आज खत्म हो जाएगी। मंच की खासियत न सिर्फ सांस्कृतिक छटा रही बल्कि वहां उसकी सजावट भी। पूरे मंच को फूलों से सजाया गया। यह फूल नासिक और वेस्ट बंगाल से आए थे। हमने सजवाट का काम देख रहे समीर से बात की। उन्होंने बताया कि हम देश के विभिन्न हिस्सों में काम कर चुके हैं। हमारे साथ 20 कारीगर आए हैं। फ्लावर बुके रोज तो नहीं लेकिन ओपनिंग और जिस दिन कोई खास मेहमान आता है तब जरूर बनाया जाता है। हम इसके लिए रातभर काम करते हैं। आमतौर पर फ्लावर डेकोरेशन का काम रातभर चलता है क्योंकि दिन में तो इवेंट होते हैं। इसलिए हमारी आदत हो गई है।स्टेज डेकोरेशन का काम बहुत जिम्मेदारी का होता है, इसलिए हम ट्रेंड लोगों को ही हायर करते हैं। वैसे तो ज्यादातर डिजाइनर्स पैकेज में ही आते हैं लेकिन रोजी की बात करें तो लगभग 1200 रुपए एक रात के मिल जाते हैं। सजावटी फूलों में खुशबू तो नहीं रहती लेकिन दिखने में आकर्षक होते हैं। पानी में रखने से इनकी लाइफ 5 दिन होती है जबकि बिना पानी के ये 2 दिन चलते हैं।आजकल सिर्फ शादी समारोह में ही फ्लॉवर डेकोरेशन नहीं होता, छोटे-बड़े सारे इवेंट में मंच को फूलों से सजाया जाता है। वैसे भी देश में सालभर कुछ न कुछ तीज-त्योहार और फंक्शन होते ही हैं। इसलिए हमें सालभर काम मिलता है।

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काका खबरीलाल

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