सरायपाली : कोविडकाल में शिक्षक के मन में जागा प्रकृति मोह 1000 से अधिक पौधो का किया रोपण

सरायपाली (काकाखबरीलाल). विगत 2 वर्षो से पूरा देश कोरोना से लड़ रहा है। कोरोना संकट से निकलने के लिए लोगों ने तरह-तरह के उपाय निकाले। कईयों ने अपना व्यवसाय ही बदल दिया, तो कुछ लोगों ने जीवन जीने की कला सीख ली, वहीं लॉकडाउन में कोराना से ऑक्सीजन की कमी का मामला सामने आने से लुकापारा के एक सेवानिवृत्त शिक्षक के मन में प्रकृति के प्रति प्रेम जगी और उन्होंने 2 साल में विभिन्न प्रजातियों के 1000 से अधिक फलदार, छायादार पौधों का रोपण कर डाला। उनके द्वारा अभी भी पौधा रोपण का कार्य बरकरार रखा गया है।
ग्राम लुकापारा के सेवानिवृत्त शिक्षक झंडुलाल चौधरी ने बताया कि कोरोना का संक्रमण दर ब्लॉक में बढते ही लॉकडाउन लागू हो गया और लोग घरों में कैद हो गये। संक्रमित लोगों में ऑक्सीजन की कमी सामने आई। लोग घरों में बैठे बैठे ऊब गये थे, समय नहीं कट रहा था, तभी श्री चौधरी के मन में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने, प्रकृति को संतुलित रखने के लिए पौधा लगाने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई और खाली पड़े प्लॉट का घेराबंदी कर 200 नग आम के पौधे लगाकर उन्होंने पौधारोपण की शुरुआत की। देखते ही देखते 2 साल में 3 एकड़ में आम, चीकू, नारियल, नींबू, केला, पपीता, फनस, बैंगन फल्ली आम, तोता फल्ली, लंगड़ा, संदूरी, दशहरी, भाटा फली आम, सीताफल, बरगद, पीपल, बादाम, काजू,आंवला, बेल, करंज, सागौन, अशोक वृक्ष, मुनगा, जामुन, रामफल, सीताफल, कोसम के लगभग 1000 से अधिक पौधों का रोपण कर दिये।
शासन का मिला सहयोग तो 1 लाख पौधे लगाने का है लक्ष्य
श्री चौधरी ने बताया कि उनके द्वारा पर्यावरण बचाने, प्रकृति को संतुलित करने एवं लोगों को ऑक्सीजन की कमी दूर करने के लिए 25 एकड़ में फैले प्लॉट में विभिन्न प्रजातियों के 1 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। अगर शासन की ओर से किसी योजना के तहत सब्सिडी मिले या उन्हें ड्रिप पद्धति से पौधारोपण में सहयोग करें तो वे अपने लक्ष्य को कुछ ही वर्षों में पूर्ण कर लेंगे।
पौधा लगाने जमीन खोदने के लिए रखा गया है मशीन
जमीन को खोदकर पौधा लगाने के लिए उन्होंने एक मशीन भी रखा है, जिसमें कुछ ही सेकंड में कई गड्ढे खोदे जा सकते हैं। उक्त मशीन को लाकर कई शासकीय विभाग के अधिकारी कर्मचारी भी परिसर में पौधारोपण के लिए उसका उपयोग करते हैं. मशीन में खुदाई से उनके समय, पैसे एवं मजदूरी की भी बचत होती है।
सुबह-शाम स्वयं करते हैं पौधों की निगरानी
पौधों को देखरेख के लिए उनके द्वारा किसी तरह का मजदूर नहीं रखा गया है, वे स्वयं सुबह-शाम पौधों की निगरानी करते हैं। पौधों को जीवित रखने के लिए दो सोलर पंप की मदद से पानी की सिंचाई की जाती है। पानी का एक बूंद भी व्यर्थ ना हो उसे ध्यान में रखते हैं। दो पौधों के बीच खाली पड़े जगहों में सब्जी भाजी भी लगाया गया है।
फसल चक्र परिवर्तन अपनाने के बावजूद नहीं मिल रहा न्याय योजना का लाभ
खेतिहर जमीन में फसल चक्र परिवर्तन कर पौधारोपण किये जाने के बावजूद शासन की महत्वाकांक्षी योजना राजीव गांधी न्याय योजना भी लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा धान पंजीयन को हटाकर पौधारोपण किया गया है।
बगीचा में सभी प्रजातियों के फलों का मिलेगा स्वाद
श्री चौधरी द्वारा बगीचा में लगाए गए विभिन्न प्रजातियों के पौधों से वहां पहुंचने वालों को सभी तरह के फलों का स्वाद चखने के लिए मिल जाएगा। फिलहाल आम में बौर, पपीता, बेर में ही फल लगना शुरू हुआ है. सभी प्रजातियों के फलों का स्वाद चखने के लिए उनके द्वारा नरसिंहनाथ, आंध्रप्रदेश, पाइकमाल, किसड़ी स्थित उद्यानिकी विभाग से फलों का पौधा लाकर लगाया गया है।























