कोरोना काल में युवाओं ने दिखाया हौसला 10 माह में 990 बेरोजगार बन गए 100 करोड़ के ठेकेदार

कोरोनाकाल में जहां कई लोगों की नौकरियां चली गई और रोजगार के अवसर पर ग्रहण के बादल मंडराने लगे, इस बीच प्रदेश सरकार के पीडब्ल्यूडी महकमे द्वारा 10 माह पूर्व बेरोजगारों के लिए लांच की गई ई-श्रेणी ठेकेदारी योजना में 990 बेरोजगार 100 करोड़ रुपए के ठेकेदार बन गए। इस योजना के तहत निर्माण काम शुरू करने के पहले ही बेरोजगारों को पांच फीसदी राशि एडवांस के तौर पर भी दी जा रही है। यही कारण है कि प्रदेश में इस योजना काे अच्छा खासा रिस्पांस मिल रहा है। राज्य शासन ने निर्माण कार्यों के ठेके के लिए लागू एकीकृत पंजीयन प्रणाली अ, ब, स, द के बाद नया श्रेणी-ई का समावेश कर बेरोजगारों को एक साल में अधिकतम 50 लाख रुपए तक काम उपलब्ध कराया जा रहा है। ई-श्रेणी में पंजीकृत युवाओं के लिए अधिकतम एकल कार्य की लागत सीमा 20 लाख रुपए है। अक्टूबर 2020 में इस योजना को प्रदेश सरकार ने हरी झंडी दिखाई थी। करीब 10 माह के भीतर 990 बेरोजगारों को 100 करोड़ रुपए का ठेका मिला है। जिससे उनकी तकदीर बदल रही है और ब्लॉक स्तर पर युवा ठेकेदार बनकर विभिन्न निर्माण कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। युवाओं के साथ ही अन्य लोगों को भी इस योजना के माध्यम से रोजगार उपलब्ध हो रहे है। इस योजना के तहत ई-श्रेणी में पंजीयन की अवधि पांच साल की है और बेरोजगार जिस ब्लॉक के निवासी हैं, उसी ब्लॉक के अंतर्गत निर्माण कार्य का ठेका मिल रहा है। जिसके कारण आपसी प्रतिस्पर्धा में कमी आई है और जरूरतमंद बेरोजगारों को एकल कार्य के तहत विभिन्न सरकारी विभागों के निर्माण कार्य करने का अवसर मिल रहा है।
ई-श्रेणी में पंजीयन कराने के मामले में जशपुर जिले के बेरोजगार युवा पहले नंबर पर है। जशपुर जिले के 308 बेरोजगारों ने लोक निर्माण विभाग में ई-श्रेणी में पंजीयन कराया है। इनमें से 78 युवाओं ने विभाग से एग्रीमेंट कर निर्माण कार्य के माध्यम से ठेकेदारी शुरू की है। वहीं नारायणपुर जिले के बेराेजगारों ने ठेकेदारी में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यहां के सिर्फ 4 युवाओं ने पंजीयन कराया है और किसी ने भी ठेकेदारी के लिए पहल नहीं की। तीन जिलों के युवाओं ने की ठेकेदारी से तौबा ई-श्रेणी में पंजीयन कराने के मामले में प्रदेश के सभी 28 जिले के युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और यह आकंड़ा 3385 पहुंच गया। इनमें से तीन जिले बेमेतरा में 44, दुर्ग 180 एवं नारायणपुर के 4 युवाओं ने ई-श्रेणी में पंजीयन कराया है, लेकिन पंजीयन कराने के बावजूद इन जिलों के युवाओं ने ठेकेदार बनने में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। राजनांदगांव के युवा ठेकेदारी में अव्वल राजनांदगांव जिले के बेराजगार पंजीयन के मामले में भले ही अन्य जिलों से बहुत पीछे है, लेकिन सर्वाधिक काम यहीं के युवाओं को मिला है। यहां के 180 युवाओं ने पंजीयन कराया है। जिनमें से 139 को विभिन्न निर्माण कार्यों का ठेका मिला है। इस जिले के 41 युवाओं को पंजीयन के बाद भी ठेका नहीं मिल सका।
























