सरायपाली :विलुप्त होने के कगार पर प्राकृतिक झरना… वर्षो पहले लगती थी जन सैलाब


>सरायपाली (काकाखबरीलाल). शहर के हृदय स्थल जयस्तंभ चैक से लगभग डेढ़ किमी की दूरी पर वार्ड क्रमांक 8 में एक प्राकृतिक छोटा सा झरना स्थित है। झरने के पास ही एक छोटा शिव मंदिर है, जहां कभी बड़ी मात्रा में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती थी। संसाधनों के अभाव में पहले क्षेत्रवासियों द्वारा उस झरने का भी काफी उपयोग किया जाता था। लेकिन समय के साथ-साथ देखरेख के अभाव में अब वह झरना विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। वहीं शिव मंदिर की भी मरम्मत की आवश्यकता है। वार्ड वासियों द्वारा स्थानीय नगरीय प्रशासन से इस ओर विशेष ध्यान देने एवं लोगों के आस्था के प्रतीक शिव मंदिर को सुरक्षित करने तथा झरना के अस्तित्व को बचाने के लिए उस स्थान पर सौंदर्यीकरण करने की मांग की जा रही है। शिव मंदिर की भी मरम्मत की आवश्यकता

शहर के वार्ड क्रमांक 8 में नर्सरी रोपणी के पास एक छोटा सा प्राकृतिक झरना है तथा झरने से लगकर एक शिव मंदिर भी है जो अब टूटने के कगार पर है। एक समय था जब महाशिवरात्रि में यहां पर हजारों की भीड़ जुटती थी। यहां प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि में वार्ड के कुछ लोगों द्वारा रंगाई पोताई, तोरण सजाकर पूजा पाठ करने के लिए तैयार किया जाता है, जहां सैकड़ों श्रद्धालु पूजा करने पहुंचते हैं। लगभग 42 वर्ष पूर्व सन् 1980 में वार्ड क्रमांक 8 में स्थित नर्सरी रोपणी के समीप प्राकृतिक झरने को देखकर रोपणी के अधिकारी श्री साहू के द्वारा सीमेंट के पाईप का बिंब बनाकर उसके सहारे गुंबद बनाकर शिव मंदिर का निर्माण कर शिवलिंग बिठाया गया था। कुछ वर्षों में वह पाईप टूटने की स्थिति में पहुंच गया, तब वार्ड के अर्जुन कुजूर व गुड्डू निषाद ने उस शिव मंदिर के तीनों ओर इंट, सीमेंट इकट्ठा कर उस मंदिर को गिरने से बचाया और सौंदर्य रूप दिया। उसके पश्चात मंदिर में प्रति सप्ताह पूजा पाठ प्रारंभ किए तथा सावन के महीने में प्रत्येक सोमवार को माइक से गीत संगीत एवं कार्यक्रम का आयोजन होता था। वहीं प्राकृतिक झरने का भी लोग आनंद लेते थे। यहां एक विशालकाय जाम का वृक्ष तथा एक वट वृक्ष है, जो आने वाले लोगों को छांव देखकर शीतलता प्रदान करता है। सुविधाओं के अभाव में प्राकृतिक झरना लुप्त होने के कगार पर वर्षों पहले इस प्राकृतिक झरने से वार्ड के लोग पीने के लिए पानी लेने आया करते थे और वहीं पर ही नहाते भी थे। लेकिन घर-घर नल जल कनेक्शन होने के पश्चात पानी की समस्या दूर हुई और लोगों का इस झरने पर आना-जाना भी धीरे-धीरे बंद हो गया। अब लोग इस प्राकृतिक झरने के पास मंदिर में सोमवार व अन्य दिनों में पूजा करने आते हैं। अब तो सुविधाओं के अभाव में झरने का पानी भी दुषित हो गया है।

कुण्ड को असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया इस प्राकृतिक झरने के पानी के एकत्र होने के लिए यहां एक कुण्ड बनाया गया था, लेकिन असामाजिक तत्वों द्वारा उस कुण्ड को भी तोड़ दिया गया है। मंदिर के सामानों की कई बार हो चुकी है चोरी इस शिव मंदिर में पहले लाईट की भी व्यवस्था की गई थी, जिसमें से वायर चोरी हो जाता था। वहीं गुंबद के उपर कई बार कलश, घण्टे, तांबे का नाग भी चोरी हो जाता था। फिर भी वार्ड के लोग हारे नहीं और हर महाशिवरात्रि पर नया सामान लाकर सजावट करते थे। सौदर्यीकरण के लिए तैयार की गई थी रूपरेखा – शानी बग्गा भूतपूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शानी बग्गा के कार्यकाल 2006-07 में इस मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए सेंटपारा के मथुरा गोस्वामी एवं टावरपारा के लोगों द्वारा आवेदन दिया गया था। उसी के तहत श्रीमती बग्गा के द्वारा वार्ड क्रमांक 8 में स्थित शिव मंदिर परिसर में सीढ़िया, ब्रिज, पानी के लिए कुण्ड आदि का निर्माण किया गया था, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। श्रीमती बग्गा ने बताया कि इस कार्य के पश्चात आगे की और रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसके तहत पार्क, बगीचा आदि का निर्माण किया जाना था। लेकिन कार्यकाल समाप्ति के पश्चात इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया। सामाजिक कार्यकर्ता अगर बग्गा ने बताया कि यह एक प्राकृतिक स्थल है। इस स्थल को पिकनिक स्पाॅट, धार्मिक स्थल आदि के रूप मंे भविष्य के लिए विकसित किया जा सकता है। यहां पर विकास की जरूरत है। नगर पालिका परिषद या कोई सामाजिक संस्था इस ओर ध्यान देता है तो यह प्राकृतिक स्थल बन सकता है। अप्रैल के बाद होगा सौंदर्यीकरण इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष अमृत पटेल एवं वार्ड पार्षद हरदीप सिंह रैना ने बताया कि यह शिव मंदिर व प्राकृतिक झरना वन विभाग की भूमि पर स्थित है, इस कारण यहां पर शासन की राशि का उपयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसके सौदर्यीकरण के लिए 1 लाख रूपए देने और आगामी अपै्रल माह के बाद सौंदर्यीकरण का कार्य प्रारंभ किये जाने की बात कही।





























