अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खेत-खलिहान और नदी के किनारे कर रहे हैं प्रैक्टिस

(अंबिकापुर काकाखबरीलाल).लॉकडाउन की वजह से भारतीय खेल विकास प्राधिकरण (साई) ने हॉस्टल खाली करा दिए हैं। ऐसे में सरगुजा के बास्केटबॉल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खेत-खलिहान और नदी के किनारे प्रैक्टिस कर रहे हैं। गांव में संसाधन नहीं है, तो ये खिलाड़ी रोज सुबह-शाम तीन घंटे मेडिसन बॉल की जगह 5-7 किलो वजनी पत्थर के गोले उठाकर अभ्यास करते हैं। इसका वीडियो बनाकर कोच को भेजते, जिससे प्रैक्टिस की मॉनिटरिंग हो सके। सरगुजा में सीनियर कैटेगरी के 9 से अधिक बास्केटबॉल के इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं। जो राजनांदगांव के साईं हॉस्टल में रहकर खेलते थे। मैनपाट की सुलोचना तिग्गा बताती हैं कि वह क्रोएशिया यूरोप में खेल चुकी हैं। अब घर से रोज सुबह 5 बजे निकल जाती हैं। डेढ़ घंटे अभ्यास के बाद शाम को 4 बजे से निकलती हैं और 6 बजे तक प्रैक्टिस करती हैं। बेहतरीन शूटिंग, शॉट और ड्राइविंग पास के लिए हाथों का अभ्यास और मजबूती जरूरी है। सीतापुर इलाके की अनूपा तिर्की कहती हैं कि हॉस्टल से आने के बाद वह सहेलियों के साथ नदी किनारे अभ्यास करती हैं। सहेलियों को भी अभ्यास कराती हैं। कई सहेलियां भी बास्केटबॉल खेलना चाहती हैं। वे भी पत्थर से काम चला रही हैं। उन्होंने कहा कि साईं में जैसी डाइट मिलती थी वैसा घर में नहीं मिल पाती है। ऐसे में इसका असर प्रैक्टिस पर भी पड़ सकता है। इंटरनेशनल खिलाड़ी निशा कहती हैं कि उन्होंने अब तक थाईलैंड, फ्रांस सहित अन्य देशों में खेला है। अभी लॉक डाउन में सुबह घर के पास गार्डन में तो शाम को घर पर ही प्रैक्टिस करनी पड़ रही है। गार्डन में सुबह लोग नहीं होते हैं। इसलिए वहीं अभ्यास कर रही हैं, लेकिन शाम को वहां पुलिस के कारण घर पर ही करती हैं।काराबेल की रबीना पैकरा का कहना है कि घर में कोन के जगह पर ईंट रखकर तो मेडिसन बॉल के बदले पत्थर से अभ्यास कर रही हैं। रबीना जूनियर कैटेगरी की खिलाड़ी है। उसने बताया कि बास्केटबॉल और मैदान नहीं होने के कारण इसी तरह के प्रैक्टिस हो रही है।





























