देश-दुनिया

आज भी कायम हावै लोगन मन के भीख मागें के परंपरा

छतरसिग पटेल सराईपाली
सराईपाली।काकाखबरीलाल। बिकास खंड मा ग्रामीण सहित शहरी क्षेत्र मा लोगन मन ला घर घर जाके भीख मागत देखे जा सकत हावै, कुछ लोग मन बिमारी, व अपंगता के कारण भीख मांग कर अपना जीवन यापन करत हावै तो कुछ लोग मन आलस्य के कारण भीख मांगे के रास्ता अपना लेथे तो अनेक लोगन मन नशीली आदत के सेती ऐ रददा ला पकड़ लैथे अनेक लोगन मन मोटर साइकिल मा भीख मागे बर जाथे अऊ गाँव के ऐक घर मा मोटर साइकिल रख देथे फिर गाँव भर ला भीख मांग के अपन घर लौट जाथे ऐ प्रकार रंग रंग के भीख मांगने वाले देखे जाथे वही घर मा रहने वाला सदस्य मन बार बार आवत भिख मागने वाला लोगन मन से दुखी रथै अनेक जगह मा छोटे- छोटे बच्चा मन भीख मांगत देखे जा सकत हावै, अऊ कई बार ऐ बच्चा मन अपराधी प्रवृत्ति के ओर अग्रसर हो जाथे बचपन मा सही दिशा नहीं मिले के सेती दुसर तरफ सरकार 2 रुपये किलो चावल देके गरीबी उन्मूलन के बात करथे लेकिन दावा खोखला साबित होथे , सरकार ला ऐ दिशा मा ठोस कदम उठाए के जरूरत हावै तभी लोगन मन के भीख मांगे के आदत मा सुधार हो पाही अऊ ओमन समाज के बदलते स्वरूप के हिस्सा बन पाही अऊ एक अच्छा जीवन जी पाही.

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