छत्तीसगढ़

सरायपाली :क्या वास्तव में नए साल में सरायपाली जिला घोषित होगा अटकलों व उत्सुकता का बाजार गर्म

मुख्यमंत्री के आगमन की जनता कर रही प्रतीक्षा

सरायपाली :– सारंगढ़ के जिला बनने की घोषणा के बाद सरायपाली क्षेत्रवासियों को 30 वर्षो पुरानी जिला निर्माण की मांग को पुनः बल मिला कि अब सरायपाली को भी जिले की सौगात शीघ्र मिल जायेगी । किंतु आधा वर्ष व्यतीत होने के बावजूद भी जब मुख्यमंत्री द्वारा जिले की घोषणा नही की गई तो फिर क्षेत्रवासियों में निराशा उत्पन्न हो गई । आने वाले 22 तारीख को मुख्यमंत्री के सरायपाली व ग्रामीण क्षेत्रो में आने की घोषणा हो चुकी थी । प्रोटोकॉल भी जारी हो गया था हेलीपेड बनाने की तैयारी भी आरम्भ हो चुकी थी किंतु ठीक 2- 3 दिन पहले पता चला कि कार्यक्रम निरस्त हो गया है । अब सरायपाली क्षेत्रवासियों को अगली तारीख का इंतजार जोरो से है ।
मुख्यमंत्री का कार्यक्रम स्थगित होने को लेकर क्षेत्र में इसके अलग अलग मायने निकाले जा रहे है । कोई इसे कांग्रेस के अंदर उपजे गुटबाजी को लेकर कयास लगा रहे हैं तो कुछ लोग मुख्यमंत्री के राहुल गांधी के पदयात्रा से जोड़कर देख रहे हैं ।
विगत एक माह पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बसना विधानसभा के ग्राम गढ़फुलझर में दौरा हुआ था उस समय उम्मीद की गई थी कि सरायपाली को जिला बनाये जाने की घोषणा कर सकते हैं पर श्री भपेश बघेल द्वारा इसे चुनावी मुद्दा कहकर टाल दिया गया था ।
अविभाजित मध्यप्रदेश के समय जब 7 जुलाई 1998 को 61 वें जिले के रूप में महासमुन्द को जिला बनाया गया था । महासमुन्द को जिला घोषित किये जाने के पूर्व स्व वीरेंद्र सिंह ( पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष ) के नेतृत्व में क्षेत्रवासियों द्वारा लगातार सरायपाली को जिला बनाये जाने की मांग की गई थी । इस हेतु अपेक्षित प्रयास भी किया गया था किंतु तत्कालीन जनप्रतिनिधियों की उदाशीनता के चलते सरायपाली जिला बनने से वंचित हो गया । तब से लेकर आज तक लगभग 24 वर्ष व्ययतीत हो जाने के बाद भी सरायपाली जिला नही बन पाया । हालांकि इस दौरान विभिन्न मंचो से जिला निर्माण की मांग क्षेत्रवासियों व विभिन्न संघ व संगठनों द्वारा लगातार की जाती रही किंतु सफलता नही मिल सकी ।
सरायपाली को जिला निर्माण के लिए जिन लोगो की जिम्मेदारी है वे लोग नितान्त सक्रिय नही है । जिला निर्माण को लेकर भी लोगो मे खास उत्साह नही है ।क्षेत्र के व्यापारी व अनेक लोग सरायपाली को जिला बनाये जाने के पक्ष में नही है । वही चुने हुवे जनप्रतिनिधियो में भी जिले निर्माण को लेकर कोई खास उत्साह व रुचि दिखाई नही दे रही । जिला निर्माण को लेकर एक समिति सक्रिय जरूर है पर इस समिति के संचालकों के रवैये को लेकर लोगो मे खास उत्साह नही है । समिति में अधिकाश शासकीय सेवा में रत सेवाकर्मी हैं जिनका नगरवासियो से कोई खास लगाव नही होने से लोगो मे इनके साथ जुड़कर आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के प्रति अरुचि अधिक है । समिति व्हाट्सएप ग्रुप में सक्रिय है पर वह धरातल पर आकर जिले निर्माण के लिए संघर्ष नही कर सकती । शासकीय संहिता उन्हें ऐसा करने से रोकती है । समिति में जनाधार वाला कोई व्यक्ति नही होने व नेतृत्वहीन होने की वजह से वे सिर्फ जनप्रतिनिधियों के इर्दगिर्द ही मंडरा रहे हैं । सरायपाली को जिला बनाये जाने की मांग अधिकृत तौर पर मुख्यमंत्री से नही की गई है । पर हाँ स्थानीय विधायक द्वारा मुख्यमंत्री से जिले की मांग किये जाने की चर्चा जरूर है ।
जिले निर्माण को लेकर जो उत्साह व संघर्ष किया जाना चाहिए था उसका नितान्त अभाव है ।
लोगो मे किसी भी तरह जिले निर्माण को लेकर कोई खास उत्साह दिखाई नही दे रहा । नगरवासी , व्यापारी वर्गों व अन्य प्रभावित होने वाले लोगो मे जिले निर्माण के बाद होने वाली टेक्सवृद्धि व अन्य समस्याओं को देखते हुवे वे नही चाहते कि सरायपाली जिला बने ।ग्राम पंचायत , नगरपंचायत और अब नगरपालिका बनने के बाद नगर के विकास व सौंदर्यीकरण में कोई खास महत्वपूर्ण उपलब्धि तो मिली नही उल्टे नगरवासी टेक्स के बोझ से दब जरूर गए । जो सुविधाएं नगरवासियों को मिलनी चाहिए थी वह नही मिल सकी इसी वजह से जिले की मांग को नगरवासियों द्वारा वह समर्थन नही मिल रहा है जो मिलना चाहिए था । जिले निर्माण को लेकर अभी तक कोई धरना प्रदर्शन , सामूहिक मांग पत्र , आंदोलन , सक्रियता आम नागरिकों द्वारा आयोजित नही की गई । जिससे शासन व प्रशासन तक यह बात पहुंच सके ।
कांग्रेस सत्ता में होने के कारण काँग्रेसजन जिले निर्माण को लेकर खुलकर सामने नही आ पा रहे हैं । जिले की खुलकर मांग किये जाने को बगावत न समझे पार्टी सोचकर सभी चुप हैं । सरायपाली को जिला बनाने की मांग का समर्थन विपक्ष में बैठी भाजपा को उठाना चाहिए था किंतु वह भी अज्ञात कारणों से चुप्पी साधे हुवे है । जबकि भाजपा को इस मुद्दे को हांथोहाँथ उठाना चाहिए था । आगामी वर्ष चुनावी वर्ष होगा । चुनावी लाभ लेने कांग्रेस भी पीछे नही रहेगी । यह तय है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व भाजपा नए प्रत्याशियों को ही टिकट देगी । स्थानीय प्रत्याशियों पर दोनो पार्टियों द्वारा दांव लगाए जाने की संभवना कम है । कांग्रेस पार्टी की ओर से नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया को मैदान में उतारे जाने की अटकलें अधिक है ।
भाजपा को जिला निर्माण के मुद्दे को जोरशोर से उठाना चाहिए ताकि इस मुद्दे को लेकर वह चुनाव में उतर सके व जनभावना के अनुरूप सरकार बनने पर इसे प्राथमिकता के रूप में घोषणा किये जाने से इसका जनसमर्थन भाजपा को आगामी चुनाव में वोट के रूप में लाभ मिल सकेगा । पर दुखद की जिले निर्माण के मुद्दे पर अभी तक भाजपा चुप है ।

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छत्तरसिंग पटेल

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