खेड़िया सेवा संस्थान की अनूठी मिसाल , 21 सालों से रोजाना बांट रहे भोजन

एक ऐसा परिवार है जो दो राज्यों से एक ही तस्वीर पेश कर रहा है। मकसद सिर्फ एक कि कोई भूखा न रहे। वैसे तो कोरोना काल से जरुरतमंदों को खाना खिलाने की परंपरा ने रफ्तार पकड़ी लेकिन यह परिवार बीते दो दशकों से रोजाना गरीबों को भोजन करवा रहा है। छत्तीसगढ़ की सीमा पर मध्यप्रदेश का बिजुरी शहर है। यहां का खेड़िया परिवार समाज सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। यह परिवार रोजाना दो राज्यों के गरीबों को दो वक्त का निवाला खिला रहा है। पिता स्व राधेश्याम खेड़िया द्वारा 21 साल पहले शुरू की गई भोजशाला को बेटे बहू व जिस शहर में भी इस परिवार के सदस्य है बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं। स्व राधेश्याम खेड़िया के बेटे बालमुकुंद खेड़िया व बहू समता खेड़िया के मुताबिक उनके पिता ने अपनी माँ स्व बनारसी देवी खेड़िया की स्मृति में 2001 से बिजुरी में गरीबों को खाना खिलाने की शुरुआत की। उनके पिता कहते थे कि माँ की स्मृति में मैं यह पुण्य कार्य करता हूँ जिसे मुझे आत्मिक सुख मिलती है। और अब इस नेक कार्य को हमारा पूरा परिवार आगे बढ़ा रहा है।
स्व राधेश्याम खेड़िया ने मध्यप्रदेश के बिजुरी से निः शुल्क भोजन की शुरुआत की। यहां 2001 से निःशुल्क भोजन रोजाना सुबह 8 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक कराए जाते हैं। कोई भूखा न रहे इसी मकसद को आगे बढ़ाते हुए बसंत पंचमी से मनेन्द्रगढ़ में भी मध्यप्रदेश के बिजुरी से बनकर आने वाले भोजन को स्व राधेश्याम खेड़िया के भाई कैलाश खेड़िया और उनके पुत्र विकास खेड़िया मनेन्द्रगढ़ के खेड़िया टाकीज में सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक जरुरतमंदों को परोस रहे हैं। स्व राधेश्याम खेड़िया के बड़े बेटे आनंद खेड़िया जो बिलासपुर के व्यवसायी हैं वे यहां पिता से मिली प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए बिलासपुर में जरुतमन्दों को निःशुल्क भोजन पैकेट बंटवाते हैं। बिलासपुर के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व ऐसे इलाके जहा भी जरूरतमंद दिख जाते हैं वहां लंच पैकेट वितरित करने का काम आनंद खेड़िया बीते 1 साल से कर रहे हैं।
खेड़िया परिवार द्वारा बीते 50 साल से बिजुरी मे नेत्र शिविर का आयोजन किया जा रहा है। हर साल होने वाले इस नेत्र शिविर में मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ राज्य के लोग आते हैं। यहां उनके आंखों के चेकअप के अलावा, आंख के ऑपरेशन, नेत्र रोग की दवाइयों के अलावा आंखों के चश्मे भी निःशुल्क प्रदान किये जाते है। हर साल जनवरी माह में यह नेत्र शिविर आयोजित होता है।



























