सरायपाली :किसानों की राजस्व संबंधित मामलों का शीघ्र निराकरण नहीं…. कार्यालय के चक्कर काट रहे किसान

सरायपाली (काकाखबरीलाल). तहसील कार्यालय सरायपाली में एकमात्र तहसीलदार पदस्थ है। नायब तहसीलदार के 2 पद रिक्त हैं। अधिकतर पटवारी अपने मुख्यालय से दूर निवासरत हैं। ऐसे में किसान को अपनी राजस्व संबंधी मामलों का निराकरण समय पर करा पाना एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। किसानों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं हो पा रहा है। किसानों को कार्य के लिए कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
देर रात तक चलता है काम
किसानों की आर्थिक स्तर को सुधारने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार राजीव गांधी किसान न्याय योजना संचालित की जा रही है, लेकिन सरायपाली तहसील क्षेत्र के कई किसान राजस्व अमले की कार्यप्रणाली के चलते इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। सरायपाली तहसील अंतर्गत करीब 234 गांव आते हैं। इन दिनों तहसील कार्यालय में किसानों की काफी भीड़ लग रही है। 1 नवंबर से धान खरीदी का कार्य प्रारंभ हो रहा है। ऐसे में किसान ऋण पुस्तिका बनाने, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, अभिलेख दुरुस्ती जैसे कार्यों के लिए तहसील कार्यालय का चक्कर काटने को विवश हैं। तहसील कार्यालय में बड़ी संख्या में राजस्व मामले लंबित है।
तहसील कार्यालय पर एकमात्र तहसीलदार पदस्थ हैं एवं नायब तहसीलदार रामटेके एवं आदित्य कुंजाम के स्थानांतरण के बाद दोनों पद रिक्त हैं। ऐसे में पूरा राजस्व मामलों का भार एकमात्र महिला तहसीलदार के ऊपर निर्भर है। किसानों का कहना है कि तहसीलदार अपने कार्यालय में बैठने की बजाय पीछे बने केबिन में ज्यादा समय बैठती हैं। कई किसान चाह कर भी तहसीलदार से नहीं मिल पाते। जब कार्यालय का समय समाप्त हो जाता है तो किसानों को दो टूक सुना दिया जाता है कि समय समाप्त हो गया। तहसीलदार ममता ठाकुर ने बताया कि कोई कार्य पेंडिंग में नहीं है। जिसकी जांच पूरी हो चुकी है, उनको ऋण पुस्तिका बनाकर दिया जा चुका है।
तहसील कार्यालय देर रात तक खुला रहता है। तहसीलदार के देर रात तक काम करने के तौर तरीके से कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है वही किसान भी त्रस्त हैं। बाकी विभाग के कार्यालयों में कामकाज समेटने का समय होता है तो तहसील कार्यालय का कामकाज प्रारंभ होता है। किसान शाम होते ही तहसील कार्यालय में जुटने लगते हैं। किसानों का ऐसा कौन सा काम है, जो रात के अंधेरे में ही होता है। किसानों का कहना है कि उन्हें रात तक रुकने का शौक नहीं है उनकी मजबूरी है।
फाइलें गायब होने की शिकायत
तहसील कार्यालय से फाइलें एवं किसानों के आवेदन-पत्र गायब होने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने 21 अक्टूबर 2022 को ऋण पुस्तिका बनाने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उनका आवेदन पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। वहां के कर्मचारी काफी खोजबीन करने पर भी आवेदन नहीं मिलने की जानकारी दी जा रही है। इस तरह कार्यालय से कई फाइलें भी गायब होने की शिकायतें मिल रही हैं।
कार्यालय के आस-पास दलालों का जमघट
सरायपाली तहसील कार्यालय में अनाधिकृत व्यक्ति की आवाजाही को लेकर किसानों ने कड़ी आपत्ति जताई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि तहसील कार्यालय सरायपाली के कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने से कामकाज में कसावट आएगी और कुछ हद तक भ्रष्टाचार पर भी अंकुश भी लग पाएगा।
तहसील कार्यालय के कामकाज की हो समीक्षा
कलेक्टर को चाहिए कि सरायपाली तहसील कार्यालय के राजस्व अमले के कामकाज की विस्तृत समीक्षा करें क्योंकि राजस्व का मामला सीधे तौर पर आम आदमी से जुड़ा हुआ है। इन मामलों के निराकरण में विलंब होने से सीधा असर सरकार की छवि पर पड़ता है और सरकार की छवि सुधारने का दायित्व जिला कलेक्टर की भूमिका पर होता है। सरायपाली तहसील कार्यालय में लंबित राजस्व मामलों, विभाग अविवादित बंटवारा, अभिलेख दुरुस्ती, भू-अर्जन, किसान किताब बनाने, सीमांकन, डिजिटल हस्ताक्षर जैसे प्रकरणों की समीक्षा होनी चाहिए। राजस्व विभाग को सर्वाधिक सीमांकन बंटवारे एवं ऋण पुस्तिका से संबंधित मामले होते हैं। राजीव गांधी न्याय योजना से वंचित 31 अक्टूबर धान खरीदी के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि थी। किसानों को ऋण पुस्तिका बंटवारा नामांकन फौजी जैसे प्रकरण का निराकरण नहीं हुआ तो सैकड़ों किसान छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी योजना राजीव गांधी न्याय योजना का लाभ पाने से वंचित हो जाएंगे। इसके लिए सीधे तौर पर तहसीलदार जिम्मेदार होंगे।






























