छेरछेरा पर्व पर बच्चों और युवाओं ने घर-घर दस्तक देकर मंगा दान उत्साह के साथ मनाया पर्व

– नंदकिशोर अग्रवाल
काका खबरी लाल पिथौरा
पिथौरा नगर (काकाखबरीलाल )। दान का महापर्व छेरछेरा शुक्रवार को पुष पुन्नी के दिन परंपरागत रूप से मनाया गया ।दान देने और दान लेने की इस परम्परा को छत्तीसगढ़ में छेरछेरा त्योहार के नाम से जाना जाता है। शहर सहित ग्रामीण अंचल में शुक्रवार को पौष पूर्णिमा के दिन सुबह से ही बड़े, बूढ़े, बच्चे हाथों में झोला और बोरा लेकर गांव- गांव और गली- गली घर -घर में दस्तक देकर छेरछेरा माई कोठी के धान ला हेर हेरा कहकर छेरछेरा मांगते रहे। बता दें कि छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ का बहुत पुराना और लोक परंपरा का हिस्सा है ।जिसे सभी लोग बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं इस दिन पूरे छत्तीसगढ़ में खासकर गांव में काम बंद रखते हैं तथा घर में छत्तीसगढ़िया व्यंजन जैसे अरसा पीठा तथा गुल गुला भजिया जैसे व्यंजन बनाते हैं एवं त्यौहार का लुफ्त उठाते है ।गांव में जहां बच्चे बूढ़े हर्षोल्लास से छेरछेरा पर्व पर दान मांगने जाते हैं वही गांव में घरों के लोग उसी उत्साह के साथ धान के रूप में या नगद के रूप में बड़े उत्साह से दान में देते हैं कहते हैं कि यह त्योहार दान लेने और दान देने का ही त्यौहार है। छत्तीसगढ़ की परंपरा को गांव में आज भी जिंदा रखा गया है। एवं बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। कई जगह तो शहरों में घरों में जहां धान नहीं होता वहां घर के महिलाएं छेरछेरा मांगने वाले को नगद दान या भेंट स्वरूप चॉकलेट और पिपरमेंट बांटते देखे गए जिससे खास करके बच्चे चॉकलेट लेकर काफी खुश दिखे।

























