लांकडाऊन में फंसे हुए मजदूरों, के लिए केंद्र सरकार ने विशेष ट्रेनें चलाने का किया फैसला

(देशदुनिया काकाखबरीलाल).
देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए प्रवासी मजदूरों, छात्रों, सैलानियों व अन्य लोगों की आवाजाही के लिए केंद्र सरकार ने विशेष ट्रेनें चलाने की मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। मंत्रालय की संयुक्त सचिव पीएस श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य सरकारें इसके लिए रेलवे बोर्ड से संपर्क करके प्लान तैयार कर लें। रेलवे ने लिंगमपल्ली से हटिया, नासिक से लखनऊ, अलूवा से भुब, नासिक से भोपाल, जयपुर से पटना और कोटा से हटिया तक 6 श्रमिक ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि शुक्रवार को राजस्थान के कोटा शहर से दो स्पेशल ट्रेनें झारखंड के लिए आएंगी। इन ट्रेनों से कोटा में फंसे छात्रों को लाया जाएगा।
ट्रेनों से आवाजाही के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना जरूरी होगा। ट्रेनों को पहले सैनिटाइज किया जाएगा और हर किसी की स्क्रीनिंग होगी। घर पहुंचाने के बाद भी इनकी मेडिकल जांच की जाएगी और 14 दिन क्वारैंटाइन में रखा जाएगा।
स्पेशल ट्रेनों से यात्रा करने वाले हर यात्री को अपना फेस जरूर कवर करना होगा। जिस स्टेशन से यात्रा शुरू की जाएगी, वहां की राज्य सरकार यात्रियों के लिए खाने और पानी की व्यवस्था करेगी। ट्रेनों का टिकट राज्य सरकार की ओर से नियुक्त किए गए नोडल अफसर को बल्क में दिया जाएगा। जिन लोगों को यात्रा के लिए चिह्नित किया जाएगा, उन्हें स्टेशन पर ही मास्क और सैनिटाइजर दिए जाएंगे। नॉनएसी कोचेज में यात्रा करेंगे, हर कोच के एक सेगमेंट में 6 यात्री रहेंगे, आमतौर पर यहां 8 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होती है केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन ने बताया कि जिलों को संक्रमण के मामलों के अनुसार रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में बांटा है। देशभर में 130 जिले रेड जोन में हैं। 284 जिले ऑरेंज और 319 जिले ग्रीन जोन में हैं। रेड और ऑरेंज जोन पर स्वास्थ्य विभाग की टीम निगरानी कर रही है। खासतौर पर रेड जोन वाले जिलों में 3 मई के बाद भी सख्ती जारी रहेगी ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि संक्रमण को फैलने से रोकने में काफी हद तक सफलता मिली है। पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 1993 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 564 लोग इलाज के बाद स्वस्थ्य हुए। देश में अब तक 8888 संक्रमित मरीजों काे इलाज के बाद घर भेजा जा चुका है। रिकवरी रेट में 25.37 प्रतिशत हो गया है। गुरुवार को यह 25.19% था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में मेडिकल उपकरणों की सप्लाई बढ़ाई जा रही है। वेंटिलेटर्स, ऑक्सीजन, ऑक्सीजन सिलेंडर, पीपीई किट, एन 95 मास्क, डायग्नोस्टिक किट आदि की आपूर्ति बढाई जा रही है। हमारे लिए इसमें कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं क्योंकि इन उपकरणों की मांग पूरी दुनिया में है।
देश में 75 हजार वेंटिलेटर की जरूरत है। अभी 19 हजार 338 वेंटिलेटर उपलब्ध है। 60 हजार 884 वेंटिलेटर का ऑर्डर विदेशी कंपनियों को दिया गया है। 59 हजार 884 वेंटिलेटर घरेलु कंपनियां तैयार कर रही हैं। वेंटिलेटर चलाने के लिए स्वास् थ्यकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। देश में 5 बड़े और 600 छोटी कंपनियां ऑक्सीजन सिलेंडर तैयार कर रही हैं। 409 अस्पताल ऐसे हैं जहां पर ऑक्सीजन का जेनरेशन हैं। 4 लाख 32 हजार ऑक्सीजन सिलेंडर अभी उपलब्ध है। ये जरूरत के हिसाब से पर्याप्त है। आगे की जरूरतों को देखते हुए एक लाख 30 हजार ऑक्सीजन सिलेंडर का ऑर्डर किया गया है। 15 दिन में पीपीई किट जैसे उत्पादों की जांच करने वाले 9 नए लैब स्थापित किए गए हैं। पहले देश में केवल एक ही लैब था। 25 मार्च तक प्रतिदिन देश में 3,312 पीपीई किट का उत्पादन होता था अब हर रोज 1 लाख 86 हजार से पीपीई किट तैयार हो रहे हैं। अभी तक 21 लाख पीपीई किट प्राप्त हो चुके है। देश में 2.72 करोड़ एन-95 मास्क की जरूरत है। सरकार ने 2.49 करोड़ मास्क का ऑर्डर किया है। इनमें 1.49 करोड़ मास्क घरेलु कंपनियां तैयार कर रही हैं। हर दिन 2.30 लाख मास्क तैयार किया जा रहा है। देश में 35 लाख आरटीपीसीआर टेस्टिंग किट की जरूरत है। आईसीमएआर ने 21 लाख किट का आर्डर किया है। इसमें 2 लाख किट का निर्माण घरेलू कंपनियां करेंगी। अभी तक 13.75 लाख किट मिल चुकी हैं।
30 करोड़ हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट का उत्पादन हर रोज किया जा रहा है। लॉकडाउन से पहले यह केवल 12.23 करोड़ प्रतिदिन था। अभी तक 16 करोड़ दवा मार्केट में उतारी जा चुकी है।

























