बाल विवाह एक सामाजिक बुराई,जिसे रोकना आवश्यक – न्यायाधीश कामिनी

पिथौरा (काका खबरीलाल) । जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद के दिशा निर्देश में तालुका विधि सेवा समिति पिथौरा के द्वारा बाल विवाह रोकथाम अभियान के तहत स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर व अंजली विद्यालय विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर न्यायाधीश कामिनी जायसवाल ने छात्र-छात्राओं को बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की व 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह करना अपराध है एवं बाल विवाह करने वालों, करने वालों एवं बाल विवाह में शामिल होने वालों को 2 वर्ष तक के कठोर कारावास एवं एक लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किए जाने का प्रावधान है। उन्होंने विद्यार्थियों से बाल विवाह होने की सूचना पुलिस, प्रशासन अथवा प्राधिकरण में करने पर बल दिया।
- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चो मजदूरी करना अपराध
इस दौरान न्यायाधीश ने बाल श्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चौदह वर्ष से कम आयु के बाल मजदूर किसी कारखाने, चाय की दुकान, होटल आदि स्थानों पर कार्य कर रहे हों और कोई व्यक्ति सूचना देना चाहे तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में दे सकता है। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। बिना नाम के भी सूचना दी जा सकती है।
- बच्चो के लिए बना है अलग कानून
उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम 2000 के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए विधि के लिए संघर्षरत बच्चों के लिए संशोधित कानून 2015 बनाया गया है जिसके अनुसार बच्चों को कानूनी रूप से व्यापक अधिकार दिए गए हैं। बाल शिक्षा व बाल तस्करी पर भी विस्तार से जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को मूल अधिकारों, कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम के लिए बने कानूनों, परीक्षा में नकल तथा अनुचित साधनों के प्रयोग संबंधी कानूनों, रैगिंग विरोधी कानून, एफआई दर्ज कराने के प्रावधानों के बारे में बताया।
























