छत्तीसगढ़

जिले की अनिता बनी डिजिटल युग की बेटी….

अति संवेदनशील क्षेत्र कहे जानें वाले गांव बंजोडा में जहां कभी सिर्फ फोन करने के लिए इधर-उधर घूम कर बड़ी मुश्किल से नेटवर्क खोजने पर फोन लगाता था। आज बदले भारत के साथ अब हर चीज़ डिजिटल होने लगा है साथ ही साथ सुदूर अंचलों में शासन के द्वारा मोबाईल कनेक्टीविटी पहुंचाई जा रही है। जिससे समाज में अमूल चूल परिवर्तन दिखने लगे हैं। जहां महिलाओं की क्षेत्र के विकास में भागीदारिता दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। इस संवेदनशील अंचल की निवासी अनिता वैध ने भी अपने क्षेत्र के विकास के लिए ठान ली है और वह दिन रात क्षेत्र के विकास में अपनी योगदान दे रही हैं।

अनिता ने 12वी की शिक्षा प्राप्त करने के बाद गांव में ही रोजगार की तलाश करने की कोशिश की। तब उन्हें मनरेगा योजना अंतर्गत गांव में महिला मेट के रुप में कार्य कर गांव के लोगों को रोजगार दिलाने के संबंध में रोजग़ार सहायक विष्णु समरथ द्वारा जानकारी प्रदान की गई। इस संबंध में जानकर अनिता को उम्मीद जागी की वह मनरेगा द्वारा लोगों को रोजगार दिलाने व क्षेत्र के विकास में योगदान देने हेतु बहुत उत्साहित थीं। जिसपर उन्होंने आवेदन कर इस पद पर चयनित हुई। इसके पश्चात् उन्होंने महिला मेट के लिए जनपद पंचायत फरसगांव द्वारा महिला मेट प्रशिक्षण प्राप्त किया। जिसके बाद वे महिला मेट के रूप में कार्य करने लगीं।

इस डिजिटल युग में अब मनरेगा योजना में मजदूरों की उपस्थिति ऑनलाइन मोबाइल मॉनिटरिंग एप के माध्यम से किया जा रहा है। ताकि समय पर ही मॉनिटरिंग हो सकें साथ ही समय पर मजदूरी भुगतान हो सकें। ऐसे में इन विकास से पिछड़े क्षेत्रों में पढ़ी-लिखी महिलाओं की कमी होती है। ऐसे में अनिता ने ऑनलाईन कार्यों को करने में उत्साह दिखाया और उनको बीएफटी घासी के द्वारा मोबाइल मॉनिटरिंग के कार्यों को सिखाया गया। जिसे अनिता ने बड़ी कुशलता के साथ सीखा व जल्द ही इस पर कार्य प्रारंभ कर दिया। अनिता वैध ने मनेरगा योजना मोबाइल मॉनिटरिंग के माध्यम से भारत सरकार ही डिजिटल मॉनिटरिंग का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है।

उसकी कार्य कुशलता को देख आस-पास के लोगों में उन्होंने डिजिटल इंडिया की बेटी के रुप में अपनी पहचान बना ली है। उनके द्वारा अब तक दिये गये 287 के लक्ष्य में से 215 मस्टर रोलों का निर्माण नेटवर्क की समस्या के बावजूद भी पूरा किया है। जो कि लक्ष्य का 74ण्91 प्रतिशत है।

अनिता ने बताया कि उन्हें प्रारंभ से ही चुनौतियां पसंद थी। मनरेगा से जुडऩे के बाद उन्हें क्षेत्र के लोगों में डिजिटल कार्यों के प्रति जागरूकता के अभाव के संबंध में पता चला। मेरे मन में हमेशा से ही नई तकनीकों और डिजिटल कार्यों के प्रति लगाव था।
ऐसे में अवसर मिलने पर मेरे द्वारा कार्य में अपना श्रेष्ठ करने का प्रयास किया गया। जिससे मैं अपने क्षेत्र के विकास के लिए भी कुछ कर पा रही हूं। जो मुझे और भी प्रोत्साहन देता है।

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छत्तरसिंग पटेल

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