नई दिल्ली

Union Budget 2022: नए वित्त वर्ष की शुरुआत में ही लॉन्च होगा RBI का ‘डिजिटल रुपी’, बजट भाषण में वित्त मंत्री ने किया ऐलान

Union Budget 2022: नए वित्त वर्ष की शुरुआत में ही लॉन्च होगा RBI का 'डिजिटल रुपी', बजट भाषण में वित्त मंत्री ने किया ऐलान

हाइलाइट्स

  • RBI की डिजिटल करेंसी पर बड़ा ऐलान
  • डिजिटल इकनॉमी को देगा बिग बूस्ट
  • करेंसी मैनेजमेंट को ज्यादा इफीशिएंट और कम लागत वाला बनाएगा
  • नई दिल्ली: मोदी कार्यकाल का 10वां बजट (Budget 2022) आज मंगलवार को संसद में पेश हुआ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) वित्त वर्ष 2022-23 के लिए आम बजट (Union Budget 2022) को सुबह 11 बजे संसद में पेश किया। अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने आरबीआई की डिजिटल करेंसी पर बड़ा ऐलान किया। वित्त मंत्री ने कहा कि आरबीआई की डिजिटल करेंसी ‘डिजिटल रुपी’ को नए वित्त वर्ष की शुरुआत में ही लॉन्च कर दिया जाएगा।डिजिटल रुपी को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी व अन्य टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के जरिए पेश किया जाएगा। यह डिजिटल इकनॉमी को बिग बूस्ट देगा। करेंसी मैनेजमेंट को ज्यादा इफीशिएंट और कम लागत वाला बनाएगा।डिजिटल करेंसी पर कितना आगे बढ़ चुका है प्लान
    भारतीय रिजर्व बैंक ऐलान कर चुका है कि वह अपनी डिजिटल करेंसी लेकर आएगा। केन्द्रीय बैंक इसे चरणबद्ध तरीके से पेश करने की रणनीति पर काम कर रहा है। केंद्रीय बैंक इसे पायलट आधार पर थोक (Wholesale) और खुदरा (Retail) क्षेत्रों में पेश करने की प्रक्रिया में है।डिजिटल करेंसी का पूरा नाम सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (Central Bank Digital Currency or CBDC) है। जिस देश का केंद्रीय बैंक इसे जारी करता है, उस देश की सरकार की मान्यता इसे हासिल होती है। यह उस देश की केंद्रीय बैंक की बैलेंसशीट में भी शामिल होती है। इसकी खासियत यह है कि इसे देश की सॉवरेन करेंसी में बदला जा सकता है। भारत के मामले में आप इसे डिजिटल रुपया कह सकते हैं। डिजिटल करेंसी दो तरह की होती है-रिटेल और होलसेल। रिटेल डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल आम लोग और कंपनियां करती हैं। होलसेल डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल वित्तीय संस्थाओं द्वारा किया जाता है।
  • सीबीडीसी के लिए कानूनी बदलाव की जरूरत
    सीबीडीसी को लाने के लिए इसके लिए कानूनी बदलाव की जरूरत होगी, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम (Indian Reserve Bank Act) के तहत मौजूदा प्रावधान मुद्रा को भौतिक रूप से ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप सिक्का अधिनियम, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में भी संशोधन की आवश्यकता होगी। ऐसे में हो सकता है कि सरकार बजट में इन कानूनी बदलावों को लेकर कोई अहम संकेत दे दे या फिर कुछ घोषणा कर दे।
  • क्रिप्टोकरेंसी पर शीतकालीन सत्र में नहीं आ सका बिल
    सरकार की योजना थी कि क्रिप्टोकरेंसी पर विधेयक ‘द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021′ संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाए। इस बिल को लेकर सामने आई डिटेल्स के अनुसार, विधेयक में देश में सभी प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि यह प्रस्ताव भी है कि अंतर्निहित तकनीक और इसके उपयोगों को बढ़ावा देने के लिए कुछ अपवादों को अनुमति दी जाए। कानून का उल्लंघन करने वालों की बिना वारंट के गिरफ्तारी और उन्हें जमानत न मिलने की बात भी विधेयक में है। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक डिजिटल करेंसी के क्रिएशन के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने का भी प्रस्ताव था।द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021’ को कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में पेश किया जाना था। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। मंत्रिमंडल में इस विधेयक के प्रारूप पर सहमति नहीं बन पाने से उसे संसद में नहीं रखा जा सका था। इसकी एक वजह यह भी मानी जा रही है कि क्रिप्टो एक्सेंजेस समेत विभिन्न एक्सपर्ट और तबकों ने क्रिप्टो पर कोई बीच का रास्ता निकाले जाने की मांग की। क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाने के बजाय उसे रेगुलेट करने पर विचार करने की मांग की गई। क्रिप्टोकरेंसी में लगभग 1 करोड़ भारतीयों ने निवेश कर रखा है। इन 1 करोड़ निवेशकों में 10 लाख ट्रेडर्स भी शामिल हैं। सभी के पास कुल मिलाकर 10000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा के डिजिटल एसेट हैं। इससे पहले भी क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021 को पिछले साल बजट सत्र के लिए सूचीबद्ध किया था, लेकिन इसे व्यापक परामर्श के लिए पेश नहीं किया गया था।

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